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चंडीगढ़ कोर्ट ने CM मान की पत्नी के खिलाफ अपुष्ट रिश्वत आरोपों पर लगाई रोक

9 सितंबर 2026:  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर चंडीगढ़ की एक अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह, शिरोमणि अकाली दल (SAD) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ कथित रिश्वत मांगने से संबंधित अपुष्ट और मानहानिकारक सामग्री सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।

यह आदेश डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे और अंतरिम रोक की मांग पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत उन आरोपों से हुई, जिनमें डॉ. गुरप्रीत कौर पर कथित तौर पर एक रेप केस के आरोपी को राहत दिलाने के लिए 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह ने अगस्त में इन आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाया था।

इसके बाद इस मुद्दे को लेकर SAD नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट किए। गुरप्रीत कौर ने इन आरोपों को गलत, अपमानजनक और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।

कोर्ट ने किस आधार पर लगाई रोक?

चंडीगढ़ के सिविल जज जूनियर डिवीजन डॉ. प्रिक्शित ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में मामला बनाया है। अदालत ने कहा कि उसके सामने पेश किए गए पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें इस समय किसी ठोस और विश्वसनीय प्रमाण से पर्याप्त रूप से पुष्ट नहीं दिखाई देतीं।

अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना प्रकाशित करना गंभीर विषय है। कोर्ट के अनुसार, मामले में जिन सामग्री के आधार पर आरोप लगाए गए, उनकी विश्वसनीयता पर प्रथम दृष्टया सवाल मौजूद हैं।

प्रतिष्ठा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी गरिमा का अभिन्न हिस्सा है। साथ ही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी महत्वपूर्ण है। इसलिए दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

कोर्ट ने माना कि अगर अपुष्ट आरोपों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित किया जाता रहा तो इससे याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को ऐसी क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई बाद में मुश्किल होगी। अदालत ने इसी आधार पर फिलहाल अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री के नए प्रकाशन या प्रसार पर रोक लगाई।

पुराने पोस्ट हटाने का आदेश अभी नहीं

अदालत ने फिलहाल पहले से प्रकाशित पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को तुरंत हटाने या डिलीट करने का आदेश नहीं दिया है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश इस स्तर पर मुख्य राहत देने के समान हो सकता है, जबकि संबंधित प्रतिवादियों को अभी नोटिस जारी किया गया है और उनका पक्ष सुना जाना बाकी है। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है।

5 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों पर विवाद

इस पूरे विवाद में 5 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत की मांग का आरोप मुख्य मुद्दा बना हुआ है। हालांकि, अदालत के मौजूदा अंतरिम आदेश में इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना गया है।

अदालत ने जिन सामग्री की समीक्षा की, उनमें डीडी न्यूज से जुड़ा एक वीडियो, सुखपाल सिंह खैरा की सोशल मीडिया पोस्ट और बिक्रम सिंह मजीठिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस से संबंधित वीडियो शामिल थे। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि इन सामग्रियों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए थे।

मामले में एक अन्य व्यक्ति का वीडियो भी सामने आया

अदालत ने सिमरनजीत हुंडल के 31 अगस्त के एक इंस्टाग्राम वीडियो का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, हुंडल ने कथित तौर पर डॉ. गुरप्रीत कौर से किसी संबंध से इनकार किया और कहा कि उन्होंने न तो उनसे पैसे मांगे और न ही मुलाकात की।

अदालत ने इस सामग्री को भी प्रथम दृष्टया देखा और कहा कि इससे उन पोस्ट और आरोपों के आधार पर सवाल उठते हैं जिनके आधार पर डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ सामग्री प्रसारित की गई थी।

अगली सुनवाई 30 सितंबर को

चंडीगढ़ कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी। तब मामले में संबंधित पक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं और अदालत आगे के आदेश पर विचार करेगी।

फिलहाल अदालत की रोक एक अंतरिम आदेश है। इसका अर्थ यह है कि मानहानि का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है और मुकदमे की आगे की सुनवाई बाकी है।

राजनीतिक विवाद ने लिया कानूनी रूप

मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी से जुड़े इन आरोपों ने पंजाब की राजनीति में भी विवाद खड़ा किया था। विपक्षी नेताओं द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने कानूनी रास्ता अपनाया।

अब अदालत के अंतरिम आदेश के बाद मामले का केंद्र मानहानि, अपुष्ट आरोपों के प्रसार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन पर आ गया है।

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