8 सितंबर 2026: पंजाब ने विभाजन, बड़े पैमाने पर प्रवास और वैश्वीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण दौर देखे हैं। इन बदलावों ने राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद पंजाब का समाज समय के साथ खुद को ढालता रहा और नई परिस्थितियों को अपनाता रहा। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित महान सिंह ढेसी स्मृति व्याख्यान में शिक्षाविदों ने पंजाब के इसी सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव पर चर्चा की।
विभाजन से वैश्वीकरण तक बदलता पंजाब
व्याख्यान के दौरान गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार केएस चहल ने पंजाब के इतिहास और सामाजिक बदलाव पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन, विदेशों में प्रवास और वैश्वीकरण ने पंजाबी संस्कृति को एक नई पहचान दी है।
उनके अनुसार, विस्थापन, आर्थिक अनिश्चितता और लगातार आने वाले बदलावों के बावजूद पंजाबी समाज ने खुद को नए हालात के अनुसार ढाला और दुनिया के साथ अपना जुड़ाव बनाए रखा।
प्रवास ने पंजाब को दुनिया से जोड़ा
पंजाब के इतिहास में विदेशों की ओर प्रवास का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। बेहतर अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में पंजाबी अलग-अलग देशों में पहुंचे। समय के साथ विदेशों में बसे पंजाबी समुदायों ने अपनी संस्कृति, भाषा और पहचान को बनाए रखने के साथ-साथ नई संस्कृतियों को भी अपनाया।
केएस चहल ने कहा कि प्रवास ने पंजाब से लोगों को दूर जरूर किया, लेकिन इससे उनकी जड़ें पूरी तरह नहीं टूटीं। विदेशों में बसे लोगों ने अपनी मातृभूमि और समुदाय के लिए शिक्षा, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान जारी रखा।
महान सिंह ढेसी का योगदान याद किया गया
व्याख्यान में महान सिंह ढेसी के योगदान को भी याद किया गया। वे उत्तरी अमेरिकी सिख प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे और जालंधर से ताल्लुक रखते थे। वे उन शुरुआती पंजाबी प्रवासियों में थे, जिन्होंने उस दौर में उत्तरी अमेरिका का रुख किया, जब विदेश जाना आज की तुलना में कहीं अधिक कठिन और अनिश्चित था।
उनकी विरासत को पंजाब से जुड़े शिक्षा और सामाजिक विकास के प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। उनके पोते प्रोफेसर औतार सिंह ढेसी, जो गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के पंजाब स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और प्रमुख रह चुके हैं, ने उनकी स्मृति में विश्वविद्यालय में एक एंडोमेंट स्थापित किया। इसी के तहत हर साल स्मृति व्याख्यान आयोजित किया जाता है।
संस्कृति के साथ आधुनिकता को अपनाया
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पंजाब की पहचान केवल उसकी पुरानी परंपराओं तक सीमित नहीं रही है। समय के साथ पंजाबी समाज ने नई तकनीक, नए आर्थिक अवसरों और वैश्विक संस्कृति के साथ भी तालमेल बनाया है।
विदेशों में रहने वाला पंजाबी प्रवासी समुदाय आज भी अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देने के प्रयास करता है। साथ ही, वह उन समाजों की नई संस्कृतियों और जीवनशैली को भी अपनाता है, जहां वह रहता है।
शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ा प्रवासी समुदाय
महान सिंह ढेसी की कहानी इस बात का उदाहरण भी मानी गई कि विदेशों में बसने के बावजूद पंजाब से जुड़ाव कैसे कायम रह सकता है। प्रवासी समुदाय के कई सदस्य अपने मूल क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए योगदान देते रहे हैं।
इसी सोच के तहत महान सिंह ढेसी की स्मृति में स्थापित एंडोमेंट गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में शिक्षा और अकादमिक गतिविधियों को समर्थन दे रहा है। स्मृति व्याख्यान इसी विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बना हुआ है।
विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने रखे विचार
महान सिंह ढेसी स्मृति व्याख्यान में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह, पंजाबी अध्ययन स्कूल के प्रमुख डॉ. मनजिंदर सिंह और दिल्ली विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रवि रविंदर भी प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे।
पंजाब की पहचान बदलाव के साथ आगे बढ़ी
पंजाब का इतिहास कई बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलावों का गवाह रहा है। विभाजन के दौरान हुए विस्थापन से लेकर विदेशों में बड़े पैमाने पर प्रवास और फिर वैश्वीकरण के दौर तक, राज्य ने लगातार नई परिस्थितियों का सामना किया।
शिक्षाविदों के अनुसार, इन बदलावों के बीच पंजाबी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता रही है। इसी वजह से पंजाब की सांस्कृतिक पहचान समय के साथ बदलने के बावजूद बनी रही और उसने वैश्विक स्तर पर भी अपनी जगह कायम रखी।
