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दिल्ली में 30.7 लाख इमारतों का सर्वे, सिर्फ 62 खतरनाक घोषित; MCD की कार्रवाई पर उठे सवाल

8 सितंबर 2026: दिल्ली में खतरनाक और जर्जर इमारतों की पहचान के लिए नगर निगम की ओर से किए जाने वाले सालाना सर्वे पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इस साल मानसून से पहले MCD ने करीब 30.7 लाख इमारतों का सर्वे किया, लेकिन इनमें सिर्फ 62 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया।

यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब राजधानी में लगातार इमारतों के गिरने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। हालिया हादसों के बाद अब सवाल केवल यह नहीं है कि खतरनाक इमारतों की पहचान कितनी प्रभावी तरीके से हो रही है, बल्कि यह भी है कि जिन भवनों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

30.7 लाख इमारतों में सिर्फ 62 को खतरनाक बताया

MCD के वार्षिक प्री-मानसून सर्वे के अनुसार इस साल करीब 30.7 लाख इमारतों की जांच की गई। इनमें से केवल 62 को खतरनाक घोषित किया गया।

जोन के हिसाब से करोल बाग में सबसे ज्यादा 19 खतरनाक इमारतें चिन्हित की गईं। इसके बाद पश्चिमी जोन में 9, मध्य जोन में 8, दक्षिणी जोन में 4 और सिटी-सदर पहाड़गंज जोन में 5 इमारतें खतरनाक पाई गईं।

वहीं शाहदरा उत्तर, शाहदरा दक्षिण और सिविल लाइंस जोन में एक भी इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया।

सर्वे के बावजूद इमारत गिरने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं

MCD के सर्वे के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब दिल्ली में इमारत गिरने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया सत्य निकेतन हादसे में पांच मंजिला इमारत गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हुई।

इस घटना के बाद MCD की निगरानी और भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। निगम ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर खतरनाक और जर्जर इमारतों का नया सर्वे कराने का आदेश भी दिया है।

गफ्फार मार्केट की जर्जर इमारत पर भी सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में IIT रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर MCD ने गफ्फार मार्केट की एक इमारत को जर्जर घोषित किया था। इसके बावजूद वहां अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है और बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हो रही हैं।

इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी इमारत को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है, तो उसके बाद उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या अन्य आवश्यक कदम उठाने में इतनी देरी क्यों होती है।

रोहिणी में भी जर्जर भवन का मामला

इसी तरह रोहिणी सेक्टर-15 के कृष्णा कुंज इलाके में बी-ब्लॉक, पॉकेट बी-6 स्थित भवन संख्या 18 को भी MCD करीब चार साल पहले जर्जर घोषित कर चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, भवन के आसपास बांस की बल्लियां लगाई गई हैं और वहां ‘डेंजर जोन’ का संकेत भी लगाया गया है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि असुरक्षित घोषित भवन भविष्य में गिरता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

MCD का अपना पुरानी दिल्ली कार्यालय भी जर्जर

भवन सुरक्षा का मुद्दा केवल निजी इमारतों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी दिल्ली स्थित MCD का जोनल कार्यालय भी खराब स्थिति में है।

इस भवन की कई जगहों से दीवारों का मसाला झड़ रहा है और इमारत की हालत खराब बताई गई है। इसके अलावा यह कार्यालय भूमिगत मेट्रो लाइन के पास स्थित है और मेट्रो के गुजरने पर कंपन महसूस होने की बात भी सामने आई है।

इस भवन में MCD के जोनल संपत्ति कर और शिक्षा विभाग के कार्यालय चलते हैं। इसकी मरम्मत का मुद्दा हाल ही में स्थायी समिति की बैठक में भी उठाया गया था।

अब सिर्फ सर्वे नहीं, कार्रवाई भी जरूरी

सालाना सर्वे का उद्देश्य खतरनाक और जर्जर इमारतों की समय रहते पहचान करना है। लेकिन हालिया घटनाओं और पहले से चिन्हित भवनों की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि केवल सर्वे कराने से भवन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी।

जरूरत इस बात की है कि जिन इमारतों में गंभीर संरचनात्मक खतरा पाया जाता है, उनके संबंध में समय पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही भवन मालिकों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।

PG और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा पर भी फोकस

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने PG हब में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज कर दी है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने PG हब में सभी इमारतों का एक सप्ताह के भीतर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन परिसरों की जांच पर जोर दिया गया है जहां निर्धारित ऊंचाई या फ्लोर संबंधी नियमों का उल्लंघन होने की आशंका है।

MCD ने चार से अधिक मंजिल वाली अवैध निर्माण वाली इमारतों पर कार्रवाई और सीलिंग के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्रवाई का उद्देश्य सुरक्षा नियमों को लागू करना है, न कि छात्रों को अचानक आवास से वंचित करना।

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