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पंजाब ने नए चीफ जस्टिस की शपथ रोकने की मांग की, सरकार ने राष्ट्रपति और PM से लगाई गुहार

07 सितंबर 2026: पंजाब में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति सामने आई। पंजाब कैबिनेट ने Justice Ashwani Kumar Mishra को हाईकोर्ट का Chief Justice नियुक्त किए जाने का विरोध करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से शपथ ग्रहण समारोह को रोकने की अपील की थी।

राज्य सरकार का आरोप था कि केंद्र ने पंजाब सरकार की राय का इंतजार किए बिना Justice Mishra की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया। पंजाब कैबिनेट ने इसे निर्धारित प्रक्रिया और राज्य के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी बताया।

केंद्र की अधिसूचना के बाद बुलाई गई आपात बैठक

केंद्र सरकार ने शनिवार देर रात Justice Ashwani Kumar Mishra को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का Chief Justice नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने रविवार को आपात कैबिनेट बैठक बुलाई।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में कैबिनेट ने नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए प्रस्ताव पारित किया। सरकार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल से अनुरोध किया कि जब तक पंजाब सरकार की राय प्राप्त कर उस पर विचार नहीं किया जाता, तब तक नियुक्ति और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।

पंजाब सरकार ने MoP का दिया हवाला

पंजाब सरकार ने अपनी आपत्ति के लिए High Court के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित Memorandum of Procedure (MoP) का हवाला दिया।

कैबिनेट के मुताबिक, MoP के पैराग्राफ 6 के तहत Chief Justice of India की सिफारिश मिलने के बाद संबंधित राज्य सरकार के विचार प्राप्त किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। पंजाब सरकार का कहना था कि केंद्र ने राज्य की प्रतिक्रिया का इंतजार किए बिना नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी।

राज्य सरकार ने इसे स्थापित प्रक्रिया से हटकर उठाया गया कदम बताया।

भगवंत मान ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि केंद्र लगातार पंजाब के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि Chief Justice की नियुक्ति में राज्य की सहमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

मान ने इस विवाद को पंजाब से जुड़े अन्य मुद्दों से भी जोड़ा और केंद्र पर राज्य के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने Rural Development Fund की राशि, बाढ़ राहत पैकेज और Bhakra Beas Management Board से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।

हरपाल चीमा ने भी उठाए सवाल

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राज्य सरकार से संबंधित प्रक्रिया पूरी किए बिना नियुक्ति को अधिसूचित करना उचित नहीं था।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पहले Justice GS Sandhawalia, जो उस समय वरिष्ठतम न्यायाधीश थे, की नियुक्ति लंबे समय तक लंबित रही, जबकि Justice Mishra की नियुक्ति तेजी से आगे बढ़ाई गई।

केंद्र की ओर से पंजाब के दावे पर अलग रुख

वहीं, केंद्र की ओर से Additional Solicitor General Satya Pal Jain ने पंजाब सरकार की आपत्ति को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय था।

इससे साफ है कि नियुक्ति को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार की व्याख्या अलग-अलग है। पंजाब सरकार जहां इसे प्रक्रिया और राज्य के अधिकारों का मुद्दा बता रही थी, वहीं केंद्र की ओर से राज्य को पर्याप्त अवसर मिलने की बात कही गई।

Justice Ashwani Kumar Mishra ने ली शपथ

विवाद के बावजूद घटनाक्रम आगे बढ़ा। 7 सितंबर 2026 को Justice Ashwani Kumar Mishra ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के Chief Justice पद की शपथ ले ली। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ स्थित लोक भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में शामिल नहीं हुए।

नियुक्ति को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ा

Justice Mishra की नियुक्ति का मुद्दा अब केवल न्यायिक नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पंजाब और केंद्र के बीच राजनीतिक एवं संवैधानिक टकराव का विषय भी बन गया है।

विपक्षी कांग्रेस ने भी पंजाब सरकार के रुख की आलोचना की और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। दूसरी ओर, पंजाब सरकार लगातार अपने रुख को राज्य के संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित प्रक्रिया से जोड़ रही है।

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