7 सितंबर 2026 चंडीगढ़ नगर निगम ने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम ने शहर की स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया है। इसके तहत मौजूदा LED लाइटों को नई तकनीक वाली स्मार्ट LED लाइटों से बदला जाएगा और केंद्रीय निगरानी व्यवस्था को दोबारा मजबूत किया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था 10 साल की अवधि के लिए प्रस्तावित की गई है।
45,870 से ज्यादा लाइटों का होगा आधुनिकीकरण
चंडीगढ़ नगर निगम शहर की सार्वजनिक स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का संचालन करता है। शहर में करीब 45,871 LED लाइट पॉइंट पहले से लगाए गए हैं। अब इन लाइटों को नई पीढ़ी की तकनीक से अपग्रेड करने की तैयारी है।
नगर निगम का उद्देश्य केवल पुरानी लाइटों को बदलना नहीं है, बल्कि पूरी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को स्मार्ट और बेहतर निगरानी वाली प्रणाली में बदलना है। इसके लिए एक निजी एजेंसी को पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है।
10 साल के लिए होगी पूरी व्यवस्था
RFP के अनुसार चुनी जाने वाली एजेंसी को 10 साल की अवधि के दौरान स्ट्रीट लाइटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें लाइटों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन के साथ-साथ लंबे समय तक ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस भी शामिल होगा।
एजेंसी को कर्मचारियों, स्पेयर पार्ट्स, वाहनों और तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा शहर में स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए नागरिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली भी संचालित की जाएगी।
CCMS से होगी स्मार्ट निगरानी
नई व्यवस्था में Centralised Control and Monitoring System (CCMS) को दोबारा सक्रिय किया जाएगा। सभी स्ट्रीट लाइट पॉइंट्स के लिए नए CCMS फीडर पैनल लगाए जाने का प्रस्ताव है।
इसके जरिए लाइटों को तय समय के अनुसार चालू और बंद किया जा सकेगा। इससे स्ट्रीट लाइटों के अनावश्यक रूप से जलने से होने वाली ऊर्जा खपत को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सड़कों पर अधिक क्षमता वाली लाइटों के लिए Individual Light Controllers (ILC) लगाए जाएंगे। इनके जरिए अलग-अलग लाइटों की निगरानी और नियंत्रण किया जा सकेगा। यह सिस्टम चंडीगढ़ के Integrated Command and Control Centre (ICCC) से भी जोड़ा जाएगा।
24 घंटे निगरानी और वार्ड स्तर पर टीमें
नई व्यवस्था के तहत स्ट्रीट लाइटों की निगरानी 24 घंटे करने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए वार्ड के हिसाब से अलग-अलग मेंटेनेंस टीमें तैनात की जाएंगी।
अगर किसी इलाके में लाइट खराब होती है या स्ट्रीट लाइट से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या आती है तो शिकायत मिलने के बाद उसे ठीक करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे नागरिकों को लंबे समय तक खराब स्ट्रीट लाइटों की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
पुराने पोल और केबल भी होंगे मजबूत
इस परियोजना में सिर्फ LED लाइटों को बदलना ही शामिल नहीं है। नगर निगम ने पुराने स्ट्रीट लाइट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने की योजना बनाई है।
इसके तहत स्ट्रीट लाइट के पोल, ओवरहेड और अंडरग्राउंड केबल, अर्थिंग सिस्टम, जंक्शन बॉक्स और अन्य संबंधित इलेक्ट्रिकल एवं सिविल कार्यों की जांच और आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
नगर निगम के अनुसार, शहर की मौजूदा व्यवस्था में कई जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना हो चुका है, इसलिए व्यापक आधुनिकीकरण की जरूरत है।
2018-19 में EESL के साथ शुरू हुआ था LED प्रोजेक्ट
चंडीगढ़ में ऊर्जा दक्ष स्ट्रीट लाइटिंग की दिशा में पहले भी बड़ा प्रोजेक्ट लागू किया गया था। नगर निगम ने 2018-19 में Energy Efficiency Services Limited (EESL) के साथ मिलकर Street Lighting National Programme यानी ‘Prakash Path’ के तहत शहर में LED लाइटें लगाई थीं।
इस परियोजना के तहत लगभग 45,871 LED लाइट पॉइंट और 681 CCMS पैनल लगाए गए थे। अब EESL के ऑपरेशन और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट की अवधि समाप्त होने के बाद नगर निगम स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था को अपने स्तर पर संभाल रहा है।
ज्यादातर CCMS पैनल नहीं कर रहे काम
नगर निगम की नई RFP में मौजूदा व्यवस्था की कई कमियों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, EESL द्वारा लगाए गए 681 CCMS पैनलों में से बड़ी संख्या में अब काम नहीं कर रहे हैं।
कई इलाकों में टाइमर और घड़ियां भी सही तरीके से काम नहीं कर रही हैं। इसके कारण कुछ जगहों पर स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय से अधिक चलती हैं, जिससे अनावश्यक बिजली की खपत होती है।
इसके अलावा कई मौजूदा LED लाइटें आठ साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं और उनकी रोशनी की क्षमता नई पीढ़ी की LED तकनीक की तुलना में कम हो गई है।
35 वार्ड और 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में व्यवस्था
चंडीगढ़ नगर निगम करीब 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 35 वार्डों में सार्वजनिक स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है। ऐसे में पूरे शहर की लाइटिंग व्यवस्था को एकीकृत स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगम को खराब लाइटों की निगरानी, बिजली की खपत और रखरखाव से जुड़े कामों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग से क्या होगा फायदा?
नई तकनीक लागू होने के बाद स्ट्रीट लाइटों को निर्धारित समय के अनुसार संचालित करने, खराब लाइटों की पहचान करने और उनके रखरखाव की निगरानी को बेहतर बनाने की योजना है।
इसके साथ ही केंद्रीय कमांड सेंटर से निगरानी होने के कारण शहर की स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था पर नगर निगम का नियंत्रण मजबूत हो सकता है। 10 साल के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के कारण व्यवस्था के लंबे समय तक नियमित रखरखाव की भी उम्मीद है।
