6 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों को लेकर समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा सरकार के बीच सियासी बहस तेज हो गई है। शिक्षक दिवस के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए बंद प्राथमिक स्कूलों को दोबारा खोलने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के करीब 26,000 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी ने शिक्षक दिवस पर ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। पार्टी के अनुसार, यह कार्यक्रम बंद स्कूलों के आसपास आयोजित किया गया और इसका मुख्य संदेश था- ‘अगर स्कूल खुलेंगे तो PDA पढ़ेगा।’
‘पाठशाला पुकारे’ अभियान के जरिए सरकार पर निशाना
अखिलेश यादव ने शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान के जरिए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया। समाजवादी पार्टी के मुताबिक, पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बंद प्राथमिक स्कूलों के आसपास पहुंचे।
अखिलेश यादव का कहना है कि स्कूलों को बंद करने के बजाय सरकार को सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण साधन बताया।
‘अगर स्कूल खुलेंगे तो PDA पढ़ेगा’
अखिलेश यादव के अभियान का सबसे प्रमुख संदेश ‘अगर स्कूल खुलेंगे तो PDA पढ़ेगा’ रहा। यहां PDA से समाजवादी पार्टी का राजनीतिक सामाजिक गठबंधन पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग है।
सपा अध्यक्ष का कहना है कि इन वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक, शिक्षा के माध्यम से वंचित और कमजोर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकते हैं और समाज में बराबरी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
26 हजार स्कूलों को फिर खोलने का वादा
अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि यदि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में सरकार बनाती है तो बंद किए गए करीब 26,000 प्राथमिक स्कूलों को दोबारा खोला जाएगा।
उन्होंने भाजपा सरकार पर सरकारी स्कूलों को बंद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर सबसे अधिक गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों पर पड़ता है। सपा का दावा है कि बंद स्कूलों को फिर से शुरू करने से बड़ी संख्या में बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया
अखिलेश यादव ने शिक्षा को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक और राजनीतिक चेतना पैदा करने का माध्यम है। इससे गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के माध्यम से समाज में मौजूद भेदभाव और असमानता को चुनौती दी जा सकती है। सपा के अनुसार, मजबूत सरकारी शिक्षा व्यवस्था सामाजिक न्याय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भाजपा सरकार की शिक्षा नीति पर सपा के सवाल
प्राथमिक स्कूलों को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकारी स्कूलों को बंद करने या उन्हें दूसरे विद्यालयों में समायोजित करने से ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहस से भी जोड़ते हुए कहा है कि 2027 में यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा बना राजनीतिक मुद्दा
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो रही है। ऐसे में 26,000 प्राथमिक स्कूलों का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
समाजवादी पार्टी इसे गरीब और वंचित वर्गों के बच्चों की शिक्षा से जोड़ रही है, जबकि भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उसके अपने दावे और नीतियां हैं। आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की स्थिति और उन्हें लेकर सरकार के फैसले चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकते हैं।
शिक्षा और PDA की राजनीति
अखिलेश यादव के बयान में शिक्षा को PDA की राजनीति से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। समाजवादी पार्टी लंबे समय से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखती रही है।
‘अगर स्कूल खुलेंगे तो PDA पढ़ेगा’ का नारा इसी राजनीतिक संदेश को शिक्षा के मुद्दे के साथ जोड़ता है। पार्टी का कहना है कि सरकारी स्कूलों को मजबूत करने से उन परिवारों के बच्चों को फायदा होगा जो निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन नहीं कर सकते।
आगे भी जारी रहने की संभावना है बहस
26,000 प्राथमिक स्कूलों को लेकर अखिलेश यादव का बयान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन सकता है। एक तरफ सपा बंद स्कूलों को दोबारा खोलने का वादा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
