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जवाबदेही बढ़ाने के लिए जालंधर ट्रैफिक पुलिस को मिले बॉडी कैमरे, चेकिंग के दौरान रिकॉर्ड होगी हर कार्रवाई

6 सितंबर 2026 ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए हैं। इन कैमरों के जरिए ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों और वाहन चालकों के बीच होने वाली बातचीत और चेकिंग की कार्रवाई रिकॉर्ड की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इससे ट्रैफिक चेकिंग से जुड़ी शिकायतों और विवादों के मामलों में वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिलेगी।

20 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को दिए गए कैमरे

जालंधर के ACP ट्रैफिक अजय सिंह के अनुसार, फिलहाल ट्रैफिक पुलिस के अलग-अलग रैंक के कर्मचारियों को 20 बॉडी कैमरे दिए गए हैं। इन कैमरों को शहर के व्यस्त और संवेदनशील चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों के इस्तेमाल में लाया जाएगा।

पुलिस की योजना आने वाले समय में बॉडी कैमरों की संख्या बढ़ाने की है। कुल 100 बॉडी कैमरे हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि ड्यूटी पर तैनात अधिकतर ट्रैफिक पुलिसकर्मी कैमरों से लैस हो सकें।

चेकिंग के दौरान रिकॉर्ड होगी बातचीत

बॉडी कैमरों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालकों के बीच होने वाली बातचीत को रिकॉर्ड करना है। इससे चालान, वाहन चेकिंग, पुलिसकर्मी के व्यवहार या किसी विवाद को लेकर सामने आने वाली शिकायतों की जांच में मदद मिल सकती है।

रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने से किसी घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसे समझने के लिए पुलिस के पास एक निष्पक्ष रिकॉर्ड भी मौजूद रहेगा। इससे दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच अधिक पारदर्शी तरीके से किए जाने की उम्मीद है।

ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर भी नजर

पुलिस का कहना है कि बॉडी कैमरे केवल वाहन चालकों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए नहीं हैं, बल्कि इससे ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी।

ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे वाहन चालकों और अन्य लोगों से बातचीत के दौरान संयम, पेशेवर रवैया और शिष्टाचार बनाए रखें। कैमरों की मौजूदगी से निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने को भी बढ़ावा मिल सकता है।

ट्रक चालक से विवाद के बाद उठाया गया कदम

बॉडी कैमरों की तैनाती ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले कैंटोनमेंट इलाके के पास चेकिंग के दौरान एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी और ट्रक चालक के बीच विवाद की घटना सामने आई थी।

पुलिस के अनुसार, ट्रक चालक अपने मोबाइल फोन पर ड्राइविंग लाइसेंस दिखा रहा था। जब उसने अपना मोबाइल वापस लेने की कोशिश की तो दोनों के बीच बहस हो गई और इस दौरान पुलिसकर्मी ने ट्रक चालक को थप्पड़ मार दिया।

ACP ट्रैफिक अजय सिंह ने पुलिसकर्मी के व्यवहार को अनुचित और अस्वीकार्य बताया था। संबंधित पुलिसकर्मी को पुलिस लाइंस भेजने का आदेश दिया गया था। पुलिस ने कहा था कि आम लोगों के साथ ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को संयम और पेशेवर व्यवहार बनाए रखना चाहिए।

रिश्वत और दबाव की शिकायतों पर भी नजर

ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों और वाहन चालकों दोनों की ओर से अलग-अलग तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। पुलिसकर्मी कई बार आरोप लगाते हैं कि नियम तोड़ने वाले लोग वरिष्ठ अधिकारियों को फोन करवाकर कार्रवाई से बचने का दबाव बनाते हैं।

दूसरी ओर, कुछ वाहन चालक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने जैसे आरोप भी लगाते हैं। बॉडी कैमरों के जरिए चेकिंग प्रक्रिया रिकॉर्ड होने से ऐसी शिकायतों की जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।

संवेदनशील और व्यस्त चौराहों पर होगी तैनाती

शुरुआत में उपलब्ध कराए गए कैमरों को शहर के व्यस्त और संवेदनशील चौराहों पर ड्यूटी करने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के साथ इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे स्थानों पर होने वाली ट्रैफिक चेकिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है।

आगे कैमरों की संख्या बढ़ने के बाद अधिक पुलिसकर्मियों को इसके दायरे में लाने की योजना है।

ट्रैफिक व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

बॉडी-वॉर्न कैमरे पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। चेकिंग के दौरान होने वाली घटनाओं की रिकॉर्डिंग से शिकायतों के निपटारे और पुलिस की कार्यप्रणाली की निगरानी में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही वाहन चालकों से भी उम्मीद की जाती है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और पुलिस के साथ जांच के दौरान सहयोग करें।

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