6 सितंबर 2026 दिल्ली के शाहदरा जिले के कृष्णा नगर इलाके में 13 वर्षीय किशोरी की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि किशोरी के देर से घर लौटने पर परिवार के सदस्यों ने उसे डांटा था। इसके बाद उसकी बहन ने उसे घर में गंभीर हालत में पाया और घटना की जानकारी पुलिस को दी।
कृष्णा नगर इलाके में सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, घटना शाहदरा के कृष्णा नगर इलाके में स्थित किशोरी के घर की है। परिवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और किशोरी को डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
देर से घर लौटने को लेकर हुई थी डांट
प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोरी घर से बाहर गई थी और देर से वापस लौटी थी। घर लौटने के बाद परिवार के सदस्यों ने उसे डांटा था। पुलिस इस घटनाक्रम और उसके बाद हुई घटना के बीच की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
बहन ने देखा तो मच गई अफरा-तफरी
पुलिस के मुताबिक, बाद में किशोरी की बहन ने उसे घर में गंभीर हालत में देखा और तुरंत मदद के लिए आवाज लगाई। इसके बाद परिवार और आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
रात करीब 9:30 बजे बहन ने किया था फोन
एक पड़ोसी ने मीडिया को बताया कि किशोरी की बड़ी बहन उस समय काम पर थी। उसने करीब रात 9:30 बजे अपनी बहन को फोन किया था, लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह घर पहुंची और दरवाजा खुलवाने की कोशिश की। पड़ोसी के अनुसार, दरवाजा खोलने के बाद किशोरी की बहन ने उसे गंभीर हालत में देखा और तुरंत मदद की।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने घटना के संबंध में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की प्रारंभिक जांच की जा रही है और घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए परिवार तथा संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।
परिवार और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी
यह घटना बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य तथा परिवार में संवाद की जरूरत को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक तनाव या भावनात्मक परेशानी दिखाई दे तो परिवार को उनसे शांतिपूर्वक बात करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।
किशोरावस्था में छोटी लगने वाली परिस्थितियां भी बच्चों के लिए बहुत तनावपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे समय में डांटने के बजाय उनकी बात सुनना और उन्हें सुरक्षित महसूस कराना महत्वपूर्ण है।
