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एल निनो का खतरा बढ़ा, 2027 तक चरम मौसम की घटनाओं का जोखिम; WMO ने जारी किया अलर्ट

6 सितंबर 2026  दुनिया के मौसम को प्रभावित करने वाली एल निनो (El Niño) जलवायु घटना को लेकर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। WMO के मुताबिक मौजूदा एल निनो पहले से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में इसके बहुत मजबूत होने की संभावना है। पूर्वानुमानों के अनुसार इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है।

तेजी से मजबूत हो रहा है एल निनो

WMO के अनुसार उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यही स्थिति एल निनो को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

WMO के पूर्वानुमान बताते हैं कि यह घटना आने वाले महीनों में बहुत मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है और साल के अंत के आसपास अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। इसके जलवायु प्रभाव 2027 तक जारी रह सकते हैं।

फरवरी 2027 तक बने रहने की करीब 100% संभावना

WMO के ग्लोबल प्रोड्यूसिंग सेंटरों के पूर्वानुमानों के मुताबिक एल निनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है। संगठन ने इसे अपने पूर्वानुमानों में असाधारण रूप से उच्च विश्वास वाला आकलन बताया है।

इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष देश या क्षेत्र पर इसका असर कितना गंभीर होगा, यह केवल एल निनो की ताकत से तय नहीं होता।

बाढ़, सूखा और भीषण गर्मी का खतरा

बहुत मजबूत एल निनो के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी जैसी चरम मौसम घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। WMO ने कहा है कि एल निनो बारिश और तापमान के पैटर्न में बड़े बदलाव ला सकता है।

हालांकि, इसका प्रभाव हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होगा। स्थानीय मौसम, समुद्र की अन्य परिस्थितियां और दूसरे जलवायु कारक एल निनो के प्रभाव को बढ़ा या कम कर सकते हैं।

प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी

WMO के अनुसार मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है। जुलाई 2026 में Niño 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इसके बाद जुलाई के अंत और अगस्त के मध्य के बीच साप्ताहिक तापमान अंतर लगभग 2.2 से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

समुद्र की सतह के नीचे भी असामान्य गर्मी दर्ज की गई है। WMO के मुताबिक जुलाई और अगस्त की शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में समुद्र के नीचे का तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से अधिक था।

2027 में भी महसूस हो सकते हैं असर

एल निनो का असर केवल उस समय तक सीमित नहीं रहता जब प्रशांत महासागर का तापमान सबसे ज्यादा होता है। इसके कारण वैश्विक तापमान, बारिश और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं।

WMO का अनुमान है कि मौजूदा घटना 2026 के अंत में चरम पर पहुंच सकती है और इसके जलवायु प्रभाव 2027 में भी जारी रहेंगे।

भारत समेत कई क्षेत्रों पर नजर

एल निनो के प्रभाव को लेकर भारत सहित कई देशों में भी मौसम वैज्ञानिकों की नजर बनी हुई है। WMO के अनुसार सितंबर से नवंबर 2026 के दौरान दुनिया के लगभग सभी भू-भागों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना बढ़ी हुई है।

हालांकि भारत जैसे किसी एक देश में एल निनो का सीधा प्रभाव कितना होगा, इसका आकलन दूसरे जलवायु कारकों के साथ मिलाकर करना जरूरी है। WMO ने यह भी बताया है कि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) जैसे अन्य समुद्री-वायुमंडलीय कारक एल निनो के प्रभाव को कुछ क्षेत्रों में बदल सकते हैं।

सरकारों और एजेंसियों को तैयारी की सलाह

WMO ने राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एवं जल विज्ञान सेवाओं के साथ मिलकर शुरुआती चेतावनी और तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि मौसम से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी का इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य, जल संसाधन, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तैयारी के लिए किया जाना चाहिए।

WMO के मुताबिक इस असाधारण एल निनो के लिए असाधारण स्तर की तैयारी की जरूरत है, ताकि संभावित चरम मौसम घटनाओं के प्रभाव को कम किया जा सके।

क्या है एल निनो?

एल निनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों के सामान्य पैटर्न में बदलाव हो सकता है।

WMO के अनुसार एल निनो आमतौर पर हर दो से सात साल में विकसित होता है और सामान्यतः 9 से 12 महीने तक रह सकता है। इसका प्रभाव प्रशांत महासागर से हजारों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों के मौसम पर भी पड़ सकता है।

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