5 सितंबर 2026 महाराष्ट्र में शनिवार, 5 सितंबर को दहीहंडी उत्सव का उत्साह चरम पर है। मुंबई और आसपास के इलाकों में सुबह से ही ‘गोविंदा रे गोपाला’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। अलग-अलग इलाकों में गोविंदा पथक ऊंचे-ऊंचे मानव पिरामिड बनाकर दहीहंडी फोड़ने की तैयारी में जुटे हैं। इस बार कई आयोजकों ने ऊंचे थर लगाने वाली टीमों के लिए लाखों रुपये के इनाम घोषित किए हैं।
सुबह से ही गोविंदा मय हुआ मुंबई
दहीहंडी के मौके पर मुंबई के कई इलाकों में उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है। गोविंदा पथकों ने पहले से ही अभ्यास तेज कर दिया था और अब मैदान में अपनी ताकत, संतुलन और टीमवर्क का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
दहीहंडी में गोविंदा एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते हैं और सबसे ऊपर पहुंचने वाला गोविंदा हंडी फोड़ता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ चुनौती भी बढ़ जाती है, इसलिए पथकों के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहता है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग भी दहीहंडी को टीमवर्क, समर्पण और सामूहिक प्रयास का प्रतीक बताता है।
9 थर लक्ष्य, 11 थर के लिए खास इनाम
इस साल मुंबई में कई आयोजनों में 9 थर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 11 थर बनाने वाली टीमों के लिए विशेष पुरस्कारों की घोषणा की गई है।
आयोजकों की ओर से ज्यादा ऊंचे थर लगाने वाली टीमों को आकर्षित करने के लिए लाखों रुपये के पुरस्कार रखे गए हैं। इससे गोविंदा पथकों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।
ठाणे में भी बड़े पुरस्कार
दहीहंडी का सबसे बड़ा उत्साह मुंबई के साथ ठाणे में भी देखने को मिलता है। इस साल ठाणे के अलग-अलग आयोजकों ने लाखों रुपये के पुरस्कारों की घोषणा की है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आयोजनों में 10 और 11 थर के मानव पिरामिड बनाने वाली टीमों के लिए विशेष इनाम रखे गए हैं। संस्कृति युवा प्रतिष्ठान की दहीहंडी में 10 थर लगाने वाली टीम के लिए 11 लाख रुपये और ट्रॉफी का पुरस्कार घोषित किया गया है। वहीं कुछ अन्य आयोजकों ने 11 थर के लिए भी बड़े पुरस्कार रखे हैं।
गोविंदा पथकों में जबरदस्त तैयारी
दहीहंडी से पहले गोविंदा पथकों ने कई दिनों तक अभ्यास किया। ऊंचे थर लगाने के लिए केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि सभी सदस्यों के बीच तालमेल और सही संतुलन भी जरूरी होता है।
मुंबई और ठाणे के कई पथकों ने अभ्यास के दौरान 9 थर तक की सलामी देकर अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया है। ठाणे के कुछ पथकों ने अभ्यास शिविरों में लगातार तीसरी बार 9 थर लगाने में सफलता हासिल की।
सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान
ऊंचे मानव पिरामिड के कारण दहीहंडी में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस साल गोविंदाओं के लिए बीमा सुरक्षा को भी बढ़ाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में दहीहंडी में हिस्सा लेने वाले करीब 1.6 लाख गोविंदाओं को बीमा कवर देने की व्यवस्था की गई है।
आयोजकों की ओर से भी सुरक्षा नियमों का पालन करने और गोविंदाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है। ऊंचाई पर चढ़ने वाले बाल गोविंदाओं के लिए सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
परंपरा के साथ आधुनिक रंग
मुंबई की दहीहंडी अब केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रही है। इसमें बड़े मंच, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेलिब्रिटी की मौजूदगी और बड़ी पुरस्कार राशि भी शामिल हो गई है।
हालांकि, इस पूरे आयोजन के केंद्र में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपरा और गोविंदाओं का सामूहिक प्रयास ही रहता है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार दहीहंडी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक भावना को दर्शाने वाला प्रमुख उत्सव है।
11 थर का इंतजार
मुंबई और ठाणे में इस बार 11 थर तक पहुंचने को लेकर खास उत्साह है। ऊंचे थर लगाने वाली टीमों के लिए घोषित बड़े पुरस्कारों ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि कौन-सा गोविंदा पथक सबसे ऊंचा मानव पिरामिड बनाकर दहीहंडी फोड़ने में सफल होता है। इस दौरान टीमवर्क, संतुलन और साहस की परीक्षा होगी।
