• Wed. Sep 2nd, 2026

पुलिस ट्रांसफर, हवाला और जमीन सौदों से जुड़े मामले में FIR दर्ज नहीं करने का आरोप, ED ने पंजाब पुलिस पर उठाए सवाल

2 सितंबर 2026  पंजाब में पुलिस ट्रांसफर, कथित हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ED का कहना है कि केंद्रीय एजेंसी की ओर से “विस्तृत सबूत” उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पंजाब पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी की।

ED ने बुधवार को पंजाब सरकार के उस रुख के जवाब में अपना बयान जारी किया, जिसमें FIR दर्ज करने को लेकर राज्य सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई थी। एजेंसी के मुताबिक उसने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को 30 जुलाई और 7 अगस्त को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धारा 66(2) के तहत जांच से संबंधित सामग्री औपचारिक रूप से उपलब्ध कराई थी।

पुलिस ट्रांसफर और हवाला नेटवर्क का आरोप

ED के अनुसार, जांच के दौरान ऐसी सामग्री सामने आई, जिसमें पुलिस अधिकारियों के तबादलों, हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़े कथित नेटवर्क का संकेत मिला।

जांच एजेंसी ने दावा किया कि इस पूरे मामले में कथित बिचौलिए नितिन गोहल की भूमिका सामने आई। ED के मुताबिक नितिन गोहल पुलिस अधिकारियों के तबादलों से संबंधित अनुरोध जुटाने, पहले से हस्ताक्षर किए गए ट्रांसफर आदेशों को बाहर निकालने, हवाला लेनदेन में मदद करने और जमीन के सौदों को प्रभावित करने में कथित रूप से शामिल था।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रा और होटल खर्चों से जुड़े नकद भुगतान के प्रबंधन में भी उसकी भूमिका थी। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

30 जुलाई और 7 अगस्त को DGP को दी जानकारी

ED ने कहा कि उसने जांच से संबंधित सामग्री पंजाब के DGP को दो अलग-अलग मौकों पर उपलब्ध कराई। एजेंसी के अनुसार, 30 जुलाई और फिर 7 अगस्त को PMLA की धारा 66(2) के तहत संबंधित जानकारी औपचारिक रूप से साझा की गई।

ED का कहना है कि उपलब्ध कराई गई सामग्री में कथित नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के बारे में विशिष्ट जांच संबंधी जानकारी थी। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद भी पंजाब पुलिस की ओर से FIR दर्ज नहीं की गई।

ED ने FIR दर्ज करने को कानूनी रूप से जरूरी कदम बताया और कहा कि पुलिस को उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी।

पुलिस को दस्तावेज देने पहुंचे ED अधिकारी

ED के अनुसार, उसकी ओर से एक प्रतिनिधि 1 सितंबर को जांच से संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से पंजाब पुलिस को देने पहुंचा था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि प्रतिनिधि को दस्तावेज सौंपने के बावजूद उनकी प्राप्ति की कोई रसीद या acknowledgement नहीं दिया गया।

ED का कहना है कि इसके बाद उसे दस्तावेज आधिकारिक रूप से ईमेल के जरिए भेजने पड़े। एजेंसी ने इस घटनाक्रम को FIR दर्ज करने में कथित देरी के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

FIR दर्ज नहीं होने के बाद ED ने अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। एजेंसी ने अदालत के हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि पंजाब पुलिस को विशिष्ट जांच सामग्री उपलब्ध कराने के बावजूद उसने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।

मामले में अब अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ED की ओर से लगाए गए आरोपों और राज्य पुलिस के रुख को अदालत के समक्ष देखा जाएगा।

क्या है PMLA की धारा 66(2)?

ED ने जिस प्रावधान के तहत पंजाब पुलिस के साथ जांच सामग्री साझा करने की बात कही है, वह Prevention of Money Laundering Act की धारा 66(2) से संबंधित है।

इस तरह की व्यवस्था के तहत जांच एजेंसी किसी अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसी के साथ ऐसी जानकारी साझा कर सकती है, जो किसी अपराध या जांच से संबंधित हो सकती है। इस मामले में ED ने इसी प्रावधान के तहत पंजाब पुलिस को संबंधित सामग्री देने की बात कही है।

मामले में नितिन गोहल की भूमिका का जिक्र

ED के बयान में कथित बिचौलिए नितिन गोहल का नाम भी सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, जांच सामग्री में उसके द्वारा पुलिस ट्रांसफर से जुड़े अनुरोधों को इकट्ठा करने और ट्रांसफर आदेशों से संबंधित गतिविधियों में भूमिका निभाने का आरोप है।

इसके अलावा हवाला लेनदेन, जमीन के सौदों और नकद भुगतान से जुड़ी गतिविधियों में भी उसकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पुलिस प्रशासन से जुड़े ट्रांसफर और वित्तीय लेनदेन के कथित नेटवर्क की बात सामने आई है।

FIR दर्ज होने पर आगे बढ़ सकती है जांच

ED के अनुसार FIR दर्ज होने के बाद संबंधित आरोपों की पुलिस जांच आगे बढ़ सकती है। FIR के बाद आरोपों से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और लेनदेन की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

हालांकि, फिलहाल ED द्वारा लगाए गए आरोप जांच के स्तर पर हैं और किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही मानी जाएगी।

पंजाब सरकार और पुलिस के रुख पर नजर

इस मामले में ED और पंजाब पुलिस के बीच सामने आए मतभेदों के बाद पंजाब सरकार के रुख पर भी नजर रहेगी। ED का कहना है कि उसने जांच संबंधी सामग्री पहले ही उपलब्ध करा दी थी, जबकि FIR दर्ज नहीं होने को लेकर एजेंसी ने सवाल उठाए हैं।

अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि FIR दर्ज करने और आगे की जांच को लेकर अदालत क्या निर्देश देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *