2 सितंबर 2026 पंजाब के फरीदकोट में करीब दो साल तक ऑब्जर्वेशन होम में रहने वाले एक पाकिस्तानी किशोर को मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया गया। किशोर को 2024 में भारतीय क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने के बाद पकड़ा गया था। आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे पाकिस्तान रेंजर्स के हवाले कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, किशोर को फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला सेक्टर में 2024 के मध्य में भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने के बाद पकड़ा गया था। उसके खिलाफ पासपोर्ट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उसे फरीदकोट स्थित ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया।
फरीदकोट के ऑब्जर्वेशन होम में रहा
भारतीय अधिकारियों द्वारा पकड़े जाने के बाद किशोर को न्यायिक प्रक्रिया के तहत फरीदकोट के ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया। वहां उसने करीब दो साल का समय बिताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, किशोर की सजा 2025 के अंत तक पूरी हो गई थी। इसके बाद उसे पाकिस्तान वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। चूंकि वह पाकिस्तान का नागरिक था, इसलिए उसकी वापसी के लिए केंद्र सरकार के संबंधित विभागों से अनुमति लेना जरूरी था।
विदेश मंत्रालय से मांगी गई अनुमति
सजा पूरी होने के बाद किशोर की स्वदेश वापसी का मामला विदेश मंत्रालय यानी Ministry of External Affairs (MEA) को भेजा गया। अधिकारियों ने पाकिस्तान भेजने के लिए आवश्यक मंजूरी मांगी।
MEA से अनुमति मिलने के बाद मामला Ministry of Home Affairs (MHA) को भेजा गया। गृह मंत्रालय की ओर से भी उसकी पाकिस्तान वापसी को मंजूरी दी गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने किशोर को पाकिस्तान भेजने की अंतिम प्रक्रिया पूरी की।
इस पूरी प्रक्रिया में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आवश्यक समन्वय किया गया, ताकि किशोर को आधिकारिक तरीके से उसके देश वापस भेजा जा सके।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश
आवश्यक सरकारी मंजूरियां मिलने के बाद फरीदकोट की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुरप्रीत कौर ने किशोर को ऑब्जर्वेशन होम से रिहा करने का आदेश दिया।
रिहाई के बाद उसे सुरक्षा और प्रशासनिक औपचारिकताओं के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर तक पहुंचाया गया। वहां निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पाकिस्तान रेंजर्स को सौंप दिया गया।
अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान रवाना
किशोर को भारत-पाकिस्तान सीमा के अटारी-वाघा मार्ग से पाकिस्तान भेजा गया। यह सीमा भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों की आधिकारिक आवाजाही तथा बंदियों और नागरिकों की प्रत्यावर्तन प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है।
किशोर को सौंपने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया। इस तरह लंबे समय तक भारत में रहने के बाद उसकी अपने देश वापसी संभव हुई।
2024 में भारतीय क्षेत्र में आया था
अधिकारियों के अनुसार, किशोर 2024 में फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला सेक्टर में भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। सीमा क्षेत्र में पकड़े जाने के बाद उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की गई।
चूंकि मामला एक किशोर से जुड़ा था, इसलिए उसे सामान्य जेल में रखने के बजाय फरीदकोट स्थित ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया। बाद में न्यायिक प्रक्रिया और सजा पूरी होने के बाद उसकी स्वदेश वापसी की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
सीमा पार मामलों में कानूनी प्रक्रिया
भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े मामलों में किसी विदेशी नागरिक की वापसी केवल गिरफ्तारी या सजा पूरी होने के बाद तुरंत नहीं हो जाती। उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि, कानूनी प्रक्रिया, संबंधित मंत्रालयों की मंजूरी और दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय जैसे कई चरण पूरे करने पड़ते हैं।
इस मामले में भी किशोर की सजा पूरी होने के बाद उसे वापस पाकिस्तान भेजने के लिए MEA और MHA की मंजूरी ली गई। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही उसे पाकिस्तान रेंजर्स को सौंपा गया।
भारत-पाकिस्तान के बीच प्रत्यावर्तन प्रक्रिया
भारत और पाकिस्तान समय-समय पर एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिकों और मछुआरों की वापसी की प्रक्रिया पूरी करते रहे हैं। अटारी-वाघा बॉर्डर ऐसे प्रत्यावर्तन के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है।
मई 2026 में भी चार पाकिस्तानी कैदियों को वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान वापस भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पता चलता है कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों देशों के बीच ऐसे मामलों में प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया जारी रहती है।
किशोर को पाकिस्तान रेंजर्स के हवाले किया गया
फरीदकोट प्रशासन की ओर से आवश्यक आदेश मिलने के बाद किशोर को ऑब्जर्वेशन होम से रिहा किया गया। इसके बाद उसे अटारी सीमा तक ले जाया गया और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स के हवाले कर दिया गया।
करीब दो साल तक भारत में रहने के बाद किशोर की पाकिस्तान वापसी के साथ इस मामले की प्रक्रिया पूरी हो गई।
