22 अगस्त 2026 : पंजाब के तरनतारन जिले के लालपुर गांव के 16 वर्षीय वॉलीबॉल खिलाड़ी सुखमीत सिंह ने तमाम मुश्किलों और दो शुरुआती असफलताओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। सुखमीत ने कतर के दोहा में चल रही अंडर-17 बॉयज वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय टीम की जर्सी पहनकर अपना डेब्यू किया है।
2022 और 2023 में दो बार नहीं हुआ चयन
सुखमीत ने वर्ष 2022 और 2023 में Sports Authority of India (SAI) के सेंटरों के लिए ट्रायल दिया था, लेकिन दोनों बार वह चयनित नहीं हो सके। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करते रहे। आखिरकार 2025 में उन्होंने ट्रायल पास किया।
इसके करीब एक साल बाद उन्हें मस्तुआना साहिब के ट्रेनिंग सेंटर में जगह मिली। इसके बाद उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा और अब वह भारत की अंडर-17 टीम का हिस्सा बनकर वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेल रहे हैं।
कई खेलों में आजमाया हाथ
सुखमीत ने शुरुआत में सिर्फ वॉलीबॉल ही नहीं खेला। उन्होंने फुटबॉल, टेनिस और बैडमिंटन में भी हाथ आजमाया। बाद में उन्हें वॉलीबॉल में अपनी असली प्रतिभा नजर आई और उन्होंने इसी खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
उनके पिता गुरप्रीत सिंह, जो सरकारी प्राइमरी स्कूल शिक्षक और पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हैं, हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई के साथ खेलों में भी आगे बढ़े।
परिवार में पहले से था वॉलीबॉल का जुड़ाव
सुखमीत के परिवार का वॉलीबॉल से पुराना संबंध रहा है। उनके दादा भी वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, जबकि लालपुर गांव में भी इस खेल की मजबूत परंपरा रही है। गांव ने पूर्व भारतीय कप्तान रंजीत सिंह जैसे खिलाड़ी भी दिए हैं।
सुखमीत के पिता को भी अपने बेटे की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए परिवार और गांव के लोगों से प्रोत्साहन मिला।
कोच ने शुरुआती असफलताओं के बाद भी पहचानी प्रतिभा
मस्तुआना साहिब में सुखमीत के कोच यादविंदर सिंह औलख ने उनकी मेहनत और प्रतिभा को पहचाना। कोच के मुताबिक, शुरुआती असफलताओं के बावजूद सुखमीत में एक खास चमक थी। उन्होंने दिए गए सुझावों पर लगातार मेहनत की और आखिरकार उसका परिणाम सामने है।
अब भारत की जर्सी में दिखा रहे दम
दो बार चयन से बाहर होने के बाद अब सुखमीत सिंह भारत की अंडर-17 टीम के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेल रहे हैं। उनके लिए यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि उनके परिवार और गांव के लिए भी गर्व का पल है।
सुखमीत की कहानी उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो शुरुआती असफलताओं के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। लगातार मेहनत, सही मार्गदर्शन और परिवार के समर्थन से उन्होंने साबित किया कि दो बार की असफलता मंजिल का अंत नहीं होती।
