21 अगस्त 2026 : बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र और सभी राज्य सरकारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय बेरोजगारी, युवाओं की समस्याओं, शिक्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों जैसे गंभीर जनहित के मुद्दों पर ध्यान दें।
‘वंदे मातरम्’ पर राजनीति ठीक नहीं
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि देश में ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाना है, शुरुआती दो अंतरे गाने हैं या नहीं गाना है—इसे लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे मुद्दों के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
BSP प्रमुख ने कहा कि केंद्र और राज्यों में सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल कई बार अपने राजनीतिक स्वार्थ या अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए कानूनों और नीतियों में बदलाव करते हैं। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे द्वारा बनाए गए कानूनों को बदलने की राजनीति से आम जनता के जरूरी मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
बेरोजगार युवाओं और Gen-Z के मुद्दे उठाए
मायावती ने कहा कि इस समय देश में बेरोजगार युवाओं, Gen-Z, छात्र-छात्राओं और स्कूली बच्चों यानी Gen-Alpha से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। सरकारों और राजनीतिक दलों को इन समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।
बाढ़ पीड़ितों पर भी ध्यान देने की अपील
उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में आई भयंकर बाढ़ से जान-माल के नुकसान का भी जिक्र किया। मायावती ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद और उनके पुनर्वास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने केंद्र और सभी राज्य सरकारों तथा राजनीतिक दलों से जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर उचित ध्यान देने की अपील की।
‘जनता के असली मुद्दों पर हो चर्चा’
मायावती के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब ‘वंदे मातरम्’ के पूरे गीत और शुरुआती दो छंदों के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज है। बीजेपी पूरे गीत के गायन पर जोर दे रही है, जबकि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में शुरुआती दो छंदों की परंपरा का हवाला दे रही है।
मायावती ने दोनों पक्षों से अपील की कि राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जनता से जुड़े वास्तविक सवालों को प्राथमिकता दी जाए।
