20 अगस्त 2026 : जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान पेलेट लगने से घायल हुए प्रदर्शनकारियों को घटना के करीब एक महीने बाद भी चोटों और उनके असर से जूझना पड़ रहा है। घायलों का कहना है कि उपचार के बावजूद उन्हें पूरी तरह राहत नहीं मिली है और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
संसद मार्च के दौरान हुए थे घायल
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, संसद की ओर मार्च करने के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच कई लोगों को पेलेट से चोटें आई थीं। कुछ लोगों के शरीर और चेहरे पर चोटें लगीं, जबकि कई को आंखों और अन्य संवेदनशील हिस्सों में चोट पहुंचने की शिकायत है।
घायलों को बाद में अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया था।
एक महीने बाद भी जारी है परेशानी
घटना के करीब एक महीने बाद भी कई पीड़ितों का उपचार चल रहा है। कुछ घायलों ने बताया कि चोटों के कारण उन्हें काम करने और सामान्य गतिविधियां करने में परेशानी हो रही है।
परिवारों पर इलाज का खर्च भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिली।
कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
घायल प्रदर्शनकारियों ने पेलेट के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी।
वहीं, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का अपना पक्ष है।
न्याय और मुआवजे की मांग
पीड़ितों और उनके समर्थकों की ओर से घटना की जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और घायलों को उचित मुआवजा एवं चिकित्सा सहायता देने की मांग की जा रही है।
कुल मिलाकर, जंतर-मंतर प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान पेलेट से घायल हुए लोगों की परेशानी घटना के एक महीने बाद भी खत्म नहीं हुई है। पीड़ित अब उपचार के साथ-साथ न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
