चंडीगढ़ 09 अगस्त 2026 : पंजाब के सरहदी जिले तरनतारन के हरिके वन्यजीव सेंचुरी में सिंधु नदी डॉल्फिन के संरक्षण के लिए पंजाब सरकार ने 57 करोड़ रुपये की विशेष परियोजना केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजी है। इसके अलावा हरिके के समग्र विकास के लिए 30.44 करोड़ रुपये की एकीकृत प्रबंधन परियोजना भी तैयार की गई है।
दोनों प्रस्ताव जुलाई और अगस्त 2026 में केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। यह जानकारी विधानसभा में खडूर साहिब के विधायक मनजिंदर सिंह लापुरा के सवाल के लिखित जवाब में वन एवं वन्यजीव मंत्री लाल चंद कटारूचक ने दी। सरकार ने बताया कि हरिके अभयारण्य के लिए वर्ष 2020 से 2030 तक का 10 साल का मैनेजमेंट प्लान भी लागू है, जिस पर 42.53 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
इस योजना में जैव विविधता का संरक्षण, वेटलैंड की सुरक्षा, इको टूरिज्म को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
4 साल में 5 करोड़ खर्च
जवाब के अनुसार, एक अप्रैल 2022 से 31 जुलाई 2026 तक हरिके सेंचुरी के संरक्षण और विकास पर 4.97 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसी अवधि में फिरोजपुर वन्यजीव मंडल के लिए 6.45 करोड़ रुपये मंजूर हुए।
इन पैसों से पौधारोपण, जलकुंभी और दूसरी खरपतवार हटाने, गश्त के लिए मोटर बोट खरीदने, नए चेक पोस्ट बनाने, सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने, इंटरप्रिटेशन सेंटर को आधुनिक बनाने, बाउंड्री वाल बनाने, घास के मैदान विकसित करने और घायल वन्यजीवों के बचाव जैसे कई काम किए गए।
97 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं यहां
हरिके में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की हर साल गणना कराई जाती है। वर्ष 2022 में 56,142 पक्षी और 80 प्रजातियां दर्ज की गई थीं। 2023 में यह संख्या बढ़कर 65,624 पक्षी और 85 प्रजातियां हो गई। 2024 में 50,529 पक्षी और 81 प्रजातियां, 2025 में 57,292 पक्षी और सबसे अधिक 97 प्रजातियां दर्ज की गईं। वर्ष 2026 में 52,707 पक्षी और 87 प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं।
अप्रैल 2026 में हरिके के पानी की गुणवत्ता की दो बार जांच कराई गई। एक बार डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और दूसरी बार गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से जांच हुई। रिपोर्ट में सेंचुरी के भीतर पानी की गुणवत्ता तय मानकों के अनुसार पाई गई, लेकिन सतलुज नदी के जरिए बाहर से प्रदूषित पानी आने की बात सामने आई। इसके बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
साल में दो बार होती है निगरानी
जवाब में बताया गया कि सिंधु नदी डॉल्फिन और घड़ियाल की हर साल दो बार निगरानी की जाती है। इसके लिए नदी किनारे के गांवों के युवाओं को ब्यास मित्र के रूप में जोड़ा गया है। इनके जरिए डॉल्फिन और घड़ियाल की निगरानी के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
इसके अलावा किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, वेटलैंड दिवस, वन्यजीव सप्ताह और पर्यावरण दिवस जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सरकार ने माना कि वर्ष 2025 में ब्यास नदी में आई बाढ़ से पहले किए गए पौधारोपण का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा तेज बहाव में बह गया था। इसके बावजूद पौधों के रखरखाव और संरक्षण का काम जारी रखा गया।
केंद्रीय मंत्रालय की सिफारिशों पर कार्रवाई
वन मंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2020-22 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हरिके अभयारण्य के प्रबंधन का मूल्यांकन किया था। रिपोर्ट में प्रबंधन की सराहना की गई, लेकिन अवैध कब्जे हटाने, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों और मोटरसाइकिलों की आवाजाही रोकने तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इको डेवलपमेंट कमेटियां बनाने की सिफारिश की गई।
सरकार के अनुसार इन सिफारिशों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही सीमित की गई है, बैटरी से चलने वाले वाहन शुरू किए गए हैं और अवैध कब्जों के खिलाफ अदालत में मामले भी दायर किए गए हैं।
