28 जुलाई 2026 : केंद्र सरकार की प्रस्तावित हब-एंड-स्पोक (Hub-and-Spoke) विमानन व्यवस्था को लेकर अमृतसर की अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी पर चिंता जताई जा रही है। उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों और प्रवासी समुदाय से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बड़े हब एयरपोर्टों तक सीमित किया गया, तो अमृतसर से सीधी उड़ानों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमृतसर का श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पंजाब के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और प्रवासी भारतीयों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। ऐसे में सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में किसी भी प्रकार की कमी का असर यात्रियों, पर्यटन और व्यापार पर पड़ सकता है।
व्यापार और पर्यटन पर पड़ सकता है असर
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अमृतसर से खाड़ी देशों, यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानें कारोबार और पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। यदि यात्रियों को दूसरे शहरों के माध्यम से यात्रा करनी पड़े, तो समय और लागत दोनों बढ़ेंगे।
प्रवासी समुदाय की भी चिंता
विदेशों में रहने वाले पंजाबियों और प्रवासी संगठनों ने भी आशंका जताई है कि सीधी उड़ानों में कमी आने से यात्रियों को असुविधा होगी। उनका कहना है कि अमृतसर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर की वैश्विक हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने संतुलित नीति की वकालत की
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि हब-एंड-स्पोक मॉडल से परिचालन दक्षता बढ़ सकती है, लेकिन क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले शहरों की सीधी हवाई सेवाओं को बनाए रखना भी आवश्यक है। उनका कहना है कि नीति बनाते समय यात्रियों की सुविधा और क्षेत्रीय विकास दोनों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
