लखनऊ 25 जुलाई 2026 : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में धर्मांतरण के आरोप में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
इलाज और आर्थिक मदद का लालच देकर फंसाते थे
पुलिस के अनुसार लोगों को बीमारी ठीक करने, आर्थिक मदद और लालच या दबाव देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए आरोपी मजबूर कर रहे थे। गिरफ्तार लोगों में इस गिरोह का कथित मुख्य आरोपी डेनियल (58) भी शामिल है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों की पहचान सुबाला (51), चंद्रभान (50), आरती (40), सीमा (35), शीला (39) और अजय रावत (46) के तौर पर हुई है। ये सभी लखनऊ जिले के रहने वाले हैं।
ग्रामीण की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से एक बोलेरो, एक धार्मिक किताब, कथित तौर पर धर्मांतरण से जुड़ी पुस्तिकाएं, शादी से जुड़े दस्तावेज और बैंक विवरण की फोटोकॉपी बरामद की हैं। पुलिस ने बताया कि सातों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई एक ग्रामीण की शिकायत पर की गई, जिसने आरोप लगाया था कि यह समूह उसे और अन्य लोगों को धर्म बदलने के लिए बार-बार मजबूर करने की कोशिश कर रहा था।
पीड़ित का आरोप: इलाज के बहाने चर्च ले जाकर बनाया दबाव
एक पीडि़त ने आरोप लगाया कि उसे घुटने के दर्द के इलाज के बहाने चर्च ले जाया गया और बाद में ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला गया। पुलिस ने बताया कि जब उसने इसका विरोध किया, तो विवाद हो गया।
पूछताछ में मुख्य आरोपी ने किए कई दावे
पूछताछ के दौरान, मुख्य आरोपी डेनियल ने पुलिस को बताया कि बचपन में उसका नाम बाला सुब्रमण्यम था और तमिलनाडु के कन्याकुमारी की रहने वाली सुबाला से शादी करने से पहले उसने ईसाई धर्म अपना लिया था।
पुलिस का दावा है कि डेनियल ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह और उसकी पत्नी 1998 में कन्याकुमारी के एक चर्च के कहने पर ईसाई धर्म का प्रचार करने लखनऊ आए थे। उसने कथित तौर पर दावा किया कि उसे वाराणसी क्षेत्र के लिए पादरी नियुक्त किया गया था और चर्च उसे इलाज, आर्थिक मदद और अन्य लालच देकर लोगों का धर्मांतरण कराने का सालाना लक्ष्य देता था। पुलिस ने बताया कि डेनियल ने यह भी दावा किया कि चर्च इन गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद देता था।
