24 जुलाई 2026 : हरियाणा सरकार ने ईंट-भट्ठों के संचालन को अधिक पारदर्शी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ईंट-भट्ठों के लिए एक नया ई-पोर्टल लॉन्च किया है। सरकार ने सभी ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए इस पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, ताकि धान की पराली से बने पेलेट (Paddy Straw Pellets) के उपयोग की प्रभावी निगरानी की जा सके।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाना, वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है। ई-पोर्टल के माध्यम से ईंट-भट्ठों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईंधन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।
पराली प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों के अनुसार, धान की पराली से तैयार पेलेट पारंपरिक ईंधन का बेहतर विकल्प हैं। इनके उपयोग से किसानों को पराली के उचित प्रबंधन में मदद मिलेगी और खुले में पराली जलाने की आवश्यकता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल निगरानी होगी आसान
ई-पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ईंट-भट्ठों की गतिविधियों, ईंधन की खपत और पराली पेलेट के उपयोग की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। इससे संबंधित विभागों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध होगी और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने में आसानी होगी।
नियमों के पालन पर रहेगा जोर
सरकार ने सभी ईंट-भट्ठा संचालकों से निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम पहल
राज्य सरकार का मानना है कि यह डिजिटल व्यवस्था पराली प्रबंधन, स्वच्छ ईंधन के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
