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चार साल की उम्र में छोड़ दिया गया, अब पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतने का सपना देख रहा है अमृतसर का पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी

23 जुलाई 2026 :  महज चार साल की उम्र में परिवार से बिछड़ने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले अमृतसर के एक पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपनी जिंदगी की चुनौतियों को अपनी ताकत बना लिया है। आज वह देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पैरालंपिक में पदक जीतने का सपना देख रहा है और उसे साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है।

बचपन में परिवार का साथ छूटने के बाद उसका जीवन संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियां और शारीरिक दिव्यांगता जैसी कठिनाइयों के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी। खेल के प्रति जुनून ने उसे नई पहचान दी और बैडमिंटन कोर्ट उसके लिए उम्मीद की नई किरण बन गया।

खिलाड़ी ने स्थानीय स्तर से अपने खेल की शुरुआत की और लगातार अभ्यास के दम पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कोचों का कहना है कि उसकी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण उसे अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।

वह वर्तमान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहा है। उसका लक्ष्य आगामी पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह रोजाना कई घंटे अभ्यास करता है और अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान देता है।

खिलाड़ी का कहना है कि उसका अतीत भले ही कठिन रहा हो, लेकिन उसने कभी अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उसका मानना है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत हो तो कोई भी मुश्किल मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकती।

स्थानीय खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों का भी मानना है कि यदि उसे बेहतर सुविधाएं, आर्थिक सहायता और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिले तो वह आने वाले वर्षों में भारत के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

आज उसकी कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है। उसकी यात्रा उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं।

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