20 जुलाई 2026 : हरियाणा के रोहतक में एक उपभोक्ता को बड़ी राहत देते हुए संबंधित उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की ‘पहले से बीमारी (Pre-existing Disease)’ वाली दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी अपने दावे को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित करने में विफल रही।
मामला उस समय सामने आया जब बीमा कंपनी ने इलाज के खर्च का भुगतान यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि पॉलिसीधारक पहले से संबंधित बीमारी से पीड़ित था। इसके बाद उपभोक्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी लेने से पहले संबंधित बीमारी की जानकारी पॉलिसीधारक को थी या उसने जानबूझकर इसे छिपाया था। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने बीमा कंपनी को नियमानुसार बीमा दावे का भुगतान करने और आवश्यक होने पर अन्य निर्धारित राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। फैसले में यह भी कहा गया कि केवल ‘पहले से बीमारी’ का सामान्य दावा कर बीमा भुगतान से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक उसके समर्थन में ठोस प्रमाण न हों।
इस फैसले को बीमा उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा कंपनियों को दावा खारिज करने से पहले स्पष्ट और प्रमाणित आधार प्रस्तुत करना आवश्यक है।
