18 जुलाई 2026 हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ सालभर मशरूम उत्पादन अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण की मदद से मशरूम की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका का मजबूत साधन बनती जा रही है।
किसानों का कहना है कि पहले मशरूम की खेती सीमित मौसम तक ही होती थी, लेकिन अब नियंत्रित तापमान, आधुनिक उत्पादन तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के कारण पूरे वर्ष इसकी खेती संभव हो गई है। इससे किसानों को नियमित आय का स्रोत मिला है और खेती पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मशरूम की खेती में कम भूमि और अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है, जबकि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि युवा किसान और महिला स्वयं सहायता समूह भी इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
कृषि विभाग और विभिन्न संस्थानों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया जाता रहा तो मशरूम उत्पादन हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। कुरुक्षेत्र के किसानों की यह पहल अन्य जिलों के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
