16 जुलाई 2026 एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 225 वर्षों के दौरान दिल्ली के तेजी से हुए शहरी विस्तार का असर यमुना नदी पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में यमुना ने अपनी करीब 68 प्रतिशत चौड़ाई और 89 प्रतिशत प्राकृतिक जलप्रवाह खो दिया है।
अध्ययन के मुताबिक, बढ़ते शहरीकरण, अनियोजित निर्माण, अतिक्रमण और नदी के बाढ़ क्षेत्र में विकास गतिविधियों के कारण यमुना का प्राकृतिक स्वरूप लगातार सिमटता गया। विशेषज्ञों का कहना है कि नदी की चौड़ाई और प्रवाह में आई कमी का असर पारिस्थितिकी, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता पर भी पड़ा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि नदी संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। उनका मानना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से यमुना के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि नदी को बचाना केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जल संसाधनों और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
