10 जुलाई 2026 : पंजाब के गुरदासपुर के पदक विजेता फेंसर वरिंदर सिंह जौहल का मानना है कि खेलों में सफलता केवल शारीरिक फिटनेस से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती (Mental Resilience) से भी हासिल होती है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों से दबाव में शांत रहने और लगातार मेहनत करने की अपील की।
वरिंदर सिंह जौहल ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के करियर में जीत और हार दोनों आती हैं। ऐसे समय में मानसिक रूप से मजबूत रहना और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और अनुशासन खिलाड़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने बताया कि नियमित अभ्यास, फिटनेस, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच किसी भी खिलाड़ी की सफलता की मजबूत नींव होती है। उनका कहना है कि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि निरंतर मेहनत और मानसिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है।
पदक विजेता फेंसर ने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे हार से निराश होने के बजाय उसे सीखने का अवसर मानें। उन्होंने कहा कि हर चुनौती खिलाड़ी को और बेहतर बनने का मौका देती है और यही सोच उसे बड़े मंच पर सफलता दिला सकती है।
उन्होंने अपने खेल जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रतियोगिताओं के दौरान दबाव को नियंत्रित करना और पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन करना बेहद आवश्यक है। इसके लिए नियमित अभ्यास के साथ मानसिक प्रशिक्षण पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए।
खेल विशेषज्ञों का भी मानना है कि आधुनिक खेलों में मानसिक दृढ़ता प्रदर्शन का अहम हिस्सा बन चुकी है। खिलाड़ियों को तकनीकी कौशल के साथ-साथ मानसिक रूप से भी तैयार रहना चाहिए, ताकि वे कठिन मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
वरिंदर सिंह जौहल की प्रेरणादायक सोच युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि सफलता का रास्ता केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि मजबूत मानसिकता, अनुशासन और निरंतर प्रयास से होकर गुजरता है।
