4 जुलाई 2026 : पंजाब के फरीदकोट जिले में मूंग की ऊंची बाजार कीमतों ने फसल विविधीकरण को नई गति दी है। बेहतर मुनाफे की उम्मीद में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के बजाय मूंग जैसी दलहनी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मूंग की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और भूजल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
किसानों को मिल रहा बेहतर लाभ
इस सीजन में मूंग के अच्छे दाम मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा है। कई किसानों ने आने वाले वर्षों में भी अधिक क्षेत्र में मूंग की खेती करने की योजना बनाई है।
फसल विविधीकरण को मिल रहा प्रोत्साहन
राज्य सरकार और कृषि विभाग लंबे समय से धान पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। मूंग की बढ़ती मांग और बेहतर कीमतें इस अभियान को मजबूती दे रही हैं।
जल संरक्षण और मिट्टी के लिए भी लाभकारी
विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग की खेती में धान की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही, यह दलहनी फसल मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती है, जिससे भूमि की उर्वरता में सुधार होता है।
