20 जून 2026 : Delhi में बड़ी संख्या में ऐसे पीएचडी शोधार्थी हैं जो बिना किसी फेलोशिप या वित्तीय सहायता के अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। इन छात्रों को बढ़ते खर्च, किराया, भोजन और शोध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई शोधार्थियों का कहना है कि फंडिंग न मिलने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम नौकरी, ट्यूशन या अन्य कार्य करने पड़ रहे हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि शोध कार्य के लिए मिलने वाला समय भी कम हो जाता है।
शोध छात्रों के अनुसार, पीएचडी एक लंबी और समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसमें नियमित अध्ययन, डेटा संग्रह, लेखन और अकादमिक गतिविधियों में भाग लेना शामिल होता है। ऐसे में वित्तीय सहायता की कमी उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर देती है।
कुछ छात्रों ने बताया कि महानगर में रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। किराया, परिवहन और दैनिक जरूरतों पर होने वाला खर्च उनकी आय से कहीं अधिक है। कई शोधार्थी अपने परिवारों पर निर्भर हैं, जबकि कुछ शिक्षा जारी रखने के लिए बचत या ऋण का सहारा ले रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शोधार्थियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि वित्तीय असुरक्षा के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थी शोध छोड़ने या अन्य विकल्प चुनने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
छात्र संगठनों ने भी गैर-वित्तपोषित शोधार्थियों के लिए विशेष सहायता योजनाएं, छात्रवृत्तियां और शोध अनुदान बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा और शोध को मजबूत बनाने के लिए आर्थिक सहयोग आवश्यक है।
इस बीच, कई शोधार्थी उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित संस्थान और नीति-निर्माता उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और उन्हें बेहतर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
