3 जून 2026 : दिल्ली नगर निगम ने संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) संग्रह को बेहतर बनाने और कर दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों की पहचान के लिए ड्रोन तथा डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग करने की योजना बनाई है।
इस पहल के तहत ड्रोन की मदद से विभिन्न क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जाएगा और प्राप्त आंकड़ों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी संपत्तियों की पहचान करना है जो अभी तक कर निर्धारण प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं या जिनका रिकॉर्ड अद्यतन नहीं है।
डिजिटल ट्विन तकनीक किसी शहर, भवन या भौतिक संरचना का एक आभासी (वर्चुअल) मॉडल तैयार करती है। इससे वास्तविक और डिजिटल डेटा की तुलना करके अधिक सटीक विश्लेषण किया जा सकता है।
भौगोलिक सूचना प्रणाली के विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन मैपिंग और डिजिटल मॉडलिंग से शहरी क्षेत्रों का सटीक डेटा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।
नगर निगम का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर आधार (Tax Base) का बेहतर आकलन किया जा सकेगा और राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी। अतिरिक्त राजस्व का उपयोग नागरिक सुविधाओं और शहरी विकास कार्यों में किया जा सकता है।
शहरी नियोजन के जानकारों के अनुसार, स्मार्ट सिटी और ई-गवर्नेंस पहलों के तहत स्थानीय निकाय तेजी से डेटा आधारित प्रशासन की ओर बढ़ रहे हैं। इससे संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसी परियोजनाओं में डेटा की सटीकता, गोपनीयता और नियमित अपडेट महत्वपूर्ण होते हैं। तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकती हैं।
नई दिल्ली में यह पहल स्थानीय प्रशासन के डिजिटलीकरण और स्मार्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके सफल क्रियान्वयन से संपत्ति कर संग्रह में सुधार और शहरी सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
