28 मई 2026 : कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमित बिक्री को रोकने के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। विभाग का कहना है कि किसानों को निर्धारित दरों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
जानकारी के अनुसार, विभिन्न जिलों में उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। अधिकारियों को स्टॉक, वितरण और बिक्री रिकॉर्ड की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खेती के मौसम के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ने पर कई बार कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सामने आती हैं।
कृषि विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध होना फसलों की उत्पादकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उर्वरकों की कृत्रिम कमी या अवैध भंडारण किसानों को आर्थिक और उत्पादन संबंधी नुकसान पहुंचा सकता है।
कृषि विभाग ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि वितरण प्रणाली पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो।
सूत्रों के अनुसार, किसानों से भी अपील की गई है कि वे अधिक कीमत वसूले जाने या स्टॉक छिपाने जैसी शिकायतों की जानकारी प्रशासन को दें।
हरियाणा और पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों में खेती के मौसम के दौरान उर्वरकों की मांग काफी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन स्टॉक रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं कालाबाजारी रोकने में मदद कर सकती हैं।
ग्रामीण विकास से जुड़े जानकारों के अनुसार, किसानों को समय पर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए जरूरी है।
भारत में सरकार और कृषि विभाग समय-समय पर उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते रहते हैं।
फिलहाल, विभागीय टीमें विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी अभियान चला रही हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि खेती के मौसम में कृषि संसाधनों की पारदर्शी और निष्पक्ष आपूर्ति किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
