26 मई 2026 : पंजाब सरकार ने राज्य में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और डॉग अटैक की घटनाओं को देखते हुए 21 दिनों का विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी और टीकाकरण जैसी प्रक्रियाओं को तेज किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, हाल के समय में कई जिलों से आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद प्रशासन ने स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई करने को कहा है।
पंजाब स्थानीय निकाय विभाग और नगर निकायों को अभियान के प्रभावी संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अभियान के दौरान कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई जा रही हैं। इसके साथ ही पशु चिकित्सकों और पशु कल्याण से जुड़े कर्मचारियों की भी मदद ली जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान केवल पकड़ने से नहीं बल्कि नसबंदी, टीकाकरण और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से संभव है।
पशु कल्याण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवारा कुत्तों के प्रबंधन में मानवीय और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रेबीज संक्रमण के खतरे को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और काटने की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है।
भारत के कई राज्यों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग अटैक की घटनाओं को लेकर समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में रात के समय आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। वहीं पशु अधिकार समूहों ने मानवीय तरीके से कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में खुले कचरे और भोजन की उपलब्धता भी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने का बड़ा कारण होती है।
फिलहाल, प्रशासन ने सभी जिलों को अभियान की नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
