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पंजाब की 105 शहरी निकायों में 7,555 उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर

24 मई 2026 : पंजाब में होने वाले शहरी निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। राज्य की 105 शहरी निकायों में कुल 7,555 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए होने वाले ये चुनाव पंजाब की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।

पंजाब राज्य चुनाव आयोग के अनुसार नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी के बाद कुल 7,555 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। इनमें कई बड़े राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने मतदान की तैयारियां तेज कर दी हैं और सभी जिलों में प्रशासन को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इन चुनावों में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इन चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। पार्टी अपने शासनकाल की उपलब्धियों को जनता के सामने रख रही है और विकास कार्यों के आधार पर वोट मांग रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी भी शहरी क्षेत्रों में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी हुई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार शहरी विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर विफल रही है। पार्टी स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है और नगर निकायों में बेहतर प्रशासन देने का वादा कर रही है।

भारतीय जनता पार्टी भी इन चुनावों को गंभीरता से ले रही है। भाजपा व्यापारियों, मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि भाजपा उम्मीदवार जीतते हैं तो शहरों में बेहतर सड़कें, सफाई व्यवस्था, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिरोमणि अकाली दल भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए सक्रिय है। पार्टी नेताओं ने राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर निशाना साधा है। अकाली दल का दावा है कि पंजाब के लोग फिर से अनुभवी नेतृत्व चाहते हैं।

चुनावी प्रचार अपने चरम पर पहुंच चुका है। उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और जनसभाएं आयोजित कर रहे हैं। शहरों में पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। साफ-सफाई, जल निकासी, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और ट्रैफिक जैसी समस्याएं चुनावी मुद्दों में प्रमुख बनी हुई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। कई नेताओं को पार्टी टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

चुनाव आयोग ने मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। प्रशासन ने उम्मीदवारों को चुनाव आचार संहिता का पालन करने की चेतावनी भी दी है। वोटरों को प्रभावित करने के लिए धनबल या शराब वितरण जैसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

राज्य चुनाव आयोग ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है। पहली बार वोट डालने वाले युवाओं और महिलाओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये चुनाव केवल स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय की पंजाब की राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। शहरी क्षेत्रों में किस पार्टी को जनता का समर्थन मिलता है, इसका असर भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।

अब सभी की नजरें मतदान और चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। 105 शहरी निकायों में 7,555 उम्मीदवारों के बीच होने वाला यह मुकाबला पंजाब की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।

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