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इंजीनियरिंग छोड़ युवक ने अपनाई ऑर्गेनिक खेती, अब प्राकृतिक जीवन में मिला सुकून

18 मई 2026 :  एक समय इंजीनियरिंग की पढ़ाई और कॉर्पोरेट करियर की ओर बढ़ रहे एक बीटेक ग्रेजुएट ने अब अपनी जिंदगी की राह बदलते हुए ऑर्गेनिक खेती को अपना लिया है। युवक का कहना है कि उसे प्राकृतिक खेती में न केवल सुकून मिला बल्कि जीवन का नया उद्देश्य भी मिला है।

जानकारी के अनुसार, इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवक ने कुछ समय तक पारंपरिक करियर विकल्पों पर काम किया, लेकिन लगातार तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच वह संतुष्टि महसूस नहीं कर पा रहा था। इसके बाद उसने गांव लौटकर खेती की ओर रुख किया।

शुरुआत में परिवार और परिचितों को उसका फैसला जोखिम भरा लगा, क्योंकि अच्छी शिक्षा के बाद खेती चुनना सामान्य रास्ता नहीं माना जाता। हालांकि, युवक ने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक तरीकों को मिलाकर ऑर्गेनिक खेती शुरू की।

उसने रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर प्राकृतिक खाद, जैविक तरीकों और टिकाऊ खेती पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उसकी खेती लोगों के बीच चर्चा का विषय बनने लगी।

ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए युवक अब अन्य किसानों को भी जागरूक कर रहा है। उसका कहना है कि जैविक खेती केवल व्यवसाय नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में युवा वर्ग के बीच प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता को लेकर रुचि बढ़ी है। कई शिक्षित युवा अब पारंपरिक नौकरियों के बजाय खेती, एग्री-स्टार्टअप और टिकाऊ जीवनशैली की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

युवक के अनुसार, खेती में मेहनत जरूर है लेकिन इसमें मानसिक शांति और आत्मसंतोष भी मिलता है। उसने बताया कि प्रकृति के बीच काम करने से जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।

भारत में सरकार और विभिन्न संस्थाएं भी ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक खेती पर बढ़ती निर्भरता के बीच जैविक खेती भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।

स्थानीय लोग भी युवक की पहल की सराहना कर रहे हैं। कई किसान उससे खेती के नए तरीकों और जैविक उत्पादन के बारे में जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।

फिलहाल, युवक अपनी खेती का विस्तार करने और अधिक लोगों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।

यह कहानी यह दर्शाती है कि बदलती सोच के साथ युवा अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

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