18 अप्रैल 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा हैं।
मामला चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रहे अवैध खनन से जुड़ा है, जहां रेत की निकासी से नदी पारिस्थितिकी तंत्र और घड़ियाल जैसे दुर्लभ जीवों पर खतरा मंडरा रहा है।
अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के लिए CCTV कैमरे लगाएं और अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन से नदी की धारा, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।
इस मामले में अदालत की सख्ती को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग के जरिए इस तरह की गतिविधियों को रोका जाए।
कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चंबल क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ सख्त संदेश देता है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाता है।
