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गैस सिलेंडर के बढ़े दामों से बिगड़ा घर का बजट, भीषण गर्मी में महंगाई की मार; होटल कारोबारियों की भी बढ़ी चिंता

मुंबई 09 मार्च 2026 : अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के असर के कारण देश में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

जोगेश्वरी की एक चॉल में रहने वाली रोशना तांबड़े के परिवार में सात सदस्य हैं। इनमें से चार लोग काम के लिए बाहर जाते हैं। उनके टिफिन, पानी गर्म करने और दिन में दो बार खाना बनाने के लिए कम से कम दो सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी और अब फिर 60 रुपये बढ़ने से हर महीने घर के खर्च के लिए रखे गए बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, ऐसा उनका कहना है।

कुर्ला में घर से पोळी-भाजी (रोटी-सब्जी) केंद्र चलाने वाली सुलक्षणा और उनके पति मोहन पाटील ने भी इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। उनके केंद्र से आसपास के इलाकों में नाश्ता और टिफिन सप्लाई किया जाता है। खाना बनाने के लिए गैस की जरूरत लगातार बढ़ रही है। गर्मियों में कई लोग गांव चले जाते हैं, जिससे ऑर्डर कम हो जाते हैं, जबकि सर्दी और बरसात में मांग फिर बढ़ जाती है। इसके बावजूद राशन, सब्जियां, तेल और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना पड़ता है। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है, ऐसा उन्होंने बताया।

सिलेंडर के दाम बढ़ने से हर महीने खाना बनाने का खर्च भी बढ़ जाता है। इससे घर की बचत के लिए अलग रखी गई राशि भी कम हो जाती है। कुछ परिवार खर्च कम करने के लिए गैस की जगह वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने की कोशिश करते हैं। हालांकि आम लोगों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है, ऐसा कई लोगों का कहना है। गृहिणी कामिनी सालवी का कहना है कि ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा दबाव उस महिला पर पड़ता है, जो घर का मासिक बजट संभालती है। एक बार कीमतें बढ़ जाएं तो वे फिर कम नहीं होतीं।

होटल के खाने भी हो सकते हैं महंगे
व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत में अचानक 115 रुपये की बढ़ोतरी होने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि होटल और फास्ट फूड की कीमतें अचानक बढ़ाने से ग्राहक नाराज हो सकते हैं। ऐसे में अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो खाने की मात्रा कम की जा सकती है या जिन व्यंजनों को बनाने में ज्यादा समय लगता है, उन्हें मेन्यू से हटाया जा सकता है, ऐसा कुछ होटल व्यवसायियों का कहना है।

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