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IAS अधिकारी को कैसे किया जाता है सस्पेंड? जानिए सिविल सेवा के नियम, अधिकार और जिम्मेदारियां

28 जनवरी 2026 : उत्तर प्रदेश में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के निलंबन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए बिल और शंकराचार्य के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई थी। उन्होंने विरोध स्वरूप पोस्टर लेकर खड़े होकर अपनी असहमति जाहिर की और बाद में इस्तीफा भी दे दिया।

इसके बाद मामला और गरमा गया, जब यूपी के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूपी सरकार ने पहले इस्तीफा दे चुके IAS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया।

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसी IAS या सिविल सर्वेंट को सस्पेंड कैसे किया जाता है? क्या सरकार किसी भी अधिकारी को मनमाने ढंग से निलंबित कर सकती है?

सिविल सर्वेंट कौन होते हैं और उनसे क्या अपेक्षा की जाती है?

IAS, IPS और अन्य सिविल सेवक सिर्फ सरकारी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे संविधान के तहत जिम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारी होते हैं। उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे—

  • निजी विचारों और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखें
  • राजनीतिक रूप से निष्पक्ष (Political Neutral) रहें
  • सार्वजनिक आचरण में संयम और मर्यादा का पालन करें

इसी कारण जब कोई अधिकारी सार्वजनिक मंच, सोशल मीडिया या विरोध प्रदर्शन में खुलकर अपनी राय रखता है, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह सर्विस रूल्स के दायरे में है या नहीं।

सिविल सर्वेंट को निलंबित करने का अधिकार किसके पास होता है?

सिविल सर्वेंट को निलंबित करने का अधिकार सरकार के पास होता है, लेकिन यह अधिकार मनमाना नहीं है। इसके लिए तय नियम और प्रक्रियाएं हैं।

आमतौर पर निलंबन कब किया जाता है?

किसी अधिकारी को सस्पेंड किया जा सकता है जब—

  • उस पर गंभीर अनुशासनहीनता का आरोप हो
  • पद पर बने रहने से निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका हो
  • उसने सरकारी नियमों या आचरण संहिता का खुला उल्लंघन किया हो

निलंबन सजा नहीं होता, बल्कि यह एक अस्थायी प्रशासनिक कदम होता है, ताकि जांच शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से हो सके।

क्या सिविल सर्वेंट सार्वजनिक विरोध कर सकते हैं?

अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अधिकारियों से हमेशा राजनीतिक तटस्थता की अपेक्षा की जाती है।

नियमों के मुताबिक सिविल सर्वेंट—

  • किसी राजनीतिक आंदोलन या धरना-प्रदर्शन में भाग नहीं ले सकते
  • सरकार की नीतियों का सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं कर सकते
  • सोशल मीडिया, भाषण या लेख के जरिए सरकार की खुली आलोचना से बचना होता है

यदि किसी अधिकारी को किसी नीति से असहमति है, तो उसके लिए इंटरनल और आधिकारिक चैनल मौजूद होते हैं। सड़क, पोस्टर या सार्वजनिक मंच का सहारा नियमों के खिलाफ माना जाता है।

सिविल सेवा आचरण संहिता में किन बातों का पालन जरूरी है?

सिविल सर्वेंट्स के लिए कुछ बुनियादी नियम तय हैं, जिनका पालन हर हाल में जरूरी होता है—

  • पद की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना
  • निजी विचारों को ऑफिशियल भूमिका से अलग रखना
  • मीडिया और सोशल मीडिया पर बोलते समय संयम बरतना
  • सरकारी गोपनीय जानकारी साझा न करना

सरल शब्दों में कहें तो, ड्यूटी के साथ-साथ पर्सनल लाइफ में भी ऐसा व्यवहार करना होता है, जिससे सरकारी पद की निष्पक्षता पर सवाल न उठे।

अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 क्या कहते हैं?

इन नियमों को सिविल सेवा की रीढ़ माना जाता है—

  • Rule 3: ईमानदारी, निष्ठा और अनुशासन
  • Rule 5: राजनीतिक गतिविधियों से दूरी
  • Rule 7: बिना अनुमति मीडिया से संवाद पर रोक
  • Rule 9: सरकार की आलोचना से परहेज

इन्हीं नियमों के तहत निलंबन जैसे कदम उठाए जाते हैं।

क्या सिविल सर्वेंट की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित होती है?

अक्सर कहा जाता है कि सिविल सर्वेंट की नौकरी बहुत सुरक्षित होती है। यह बात सही है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है।

जॉब सिक्योरिटी के नियम

  • बिना जांच के बर्खास्तगी नहीं
  • अनुच्छेद 311 के तहत सुनवाई का अधिकार
  • निलंबन के दौरान भी जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance)

जवाबदेही के नियम

  • नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय
  • आचरण नियम सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू

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