21 अगस्त 2026 : पंजाब में करीब 3 लाख वाहन स्क्रैपिंग के लिए योग्य हो सकते हैं। यह जानकारी शोध आधारित थिंक टैंक Center for Study of Science, Technology and Policy (CSTEP) की ‘Pathways for Clean Transportation in Punjab’ नामक स्टडी में सामने आई है। यह अध्ययन शुक्रवार को India Clean Air Summit (ICAS) 2026 में जारी किया गया।
कम संख्या में वाहन, प्रदूषण में बड़ा योगदान
अध्ययन के अनुसार, पंजाब के कुल वाहनों में सुपर-एमिटर वाहनों की हिस्सेदारी केवल 11 से 28 प्रतिशत है, लेकिन ये वाहन राज्य के परिवहन क्षेत्र से होने वाले 70 प्रतिशत से अधिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।
CSTEP की एयर क्वालिटी पॉलिसी एंड आउटरीच ग्रुप की प्रमुख स्वगता डे ने कहा कि पुराने और भारी वाणिज्यिक वाहन (HCVs) सामान्य वाहनों की तुलना में असमान रूप से अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। इसलिए पंजाब में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था के लिए ऐसे हाई-एमिटर वाहनों की पहचान कर उन पर लक्षित कार्रवाई करना जरूरी है।
15 स्क्रैपिंग सेंटरों की जरूरत
स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि करीब 3 लाख वाहनों की संभावित स्क्रैपिंग के लिए पंजाब में 15 operational Registered Vehicle Scrapping Facilities (RVSFs) की जरूरत होगी।
फिलहाल राज्य में केवल 5 स्क्रैपिंग सुविधाएं काम कर रही हैं। इसलिए 10 और सुविधाएं स्थापित करने के लिए करीब ₹140 करोड़ के निवेश की जरूरत होगी।
भारी वाणिज्यिक वाहन सबसे ज्यादा प्रदूषणकारी
अध्ययन में पाया गया कि पंजाब के कुल वाहन बेड़े में भारी वाणिज्यिक वाहनों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.6 प्रतिशत है, लेकिन ये हर साल करीब 2,102 टन PM2.5 उत्सर्जित करते हैं।
इसके मुकाबले दोपहिया वाहन राज्य के वाहन बेड़े का बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन उनसे होने वाला PM2.5 उत्सर्जन करीब 228 टन प्रति वर्ष है। इससे पता चलता है कि सभी वाहनों पर एक समान कार्रवाई करने के बजाय ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर विशेष ध्यान देना अधिक प्रभावी हो सकता है।
10 से 15 साल पुराने वाहन अभी भी सड़कों पर
CSTEP की टीम ने पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, मोगा और होशियारपुर में सर्वे किया। इसमें पाया गया कि 10 से 15 वर्ष पुराने वाहन अभी भी विभिन्न श्रेणियों में बड़ी संख्या में सड़कों पर चल रहे हैं। तीन-पहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों में ऐसे पुराने वाहनों की मौजूदगी विशेष रूप से देखी गई।
89 फीसदी वाहन पंजाब में पंजीकृत
सर्वे के मुताबिक, सड़कों पर चलने वाले करीब 89 प्रतिशत वाहन पंजाब में ही पंजीकृत हैं। इससे पता चलता है कि राज्य स्तर पर उम्र आधारित वाहन रिटायरमेंट, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य नियामक कदम परिवहन उत्सर्जन कम करने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
अध्ययन में low-emission zones, पुराने वाहनों की age-based retirement और BS-IV भारी वाणिज्यिक वाहनों की retrofitting जैसे उपायों की सिफारिश की गई है।
शहर-केंद्रित रणनीति पर भी सवाल
स्टडी के अनुसार पंजाब में एक जिले से दूसरे जिले के बीच वाहनों की आवाजाही काफी अधिक है। इसलिए केवल शहरों तक सीमित प्रदूषण नियंत्रण रणनीति के बजाय पूरे राज्य के स्तर पर परिवहन उत्सर्जन को नियंत्रित करने वाली नीति अधिक प्रभावी हो सकती है।
कुल मिलाकर, CSTEP की स्टडी ने पंजाब में करीब 3 लाख वाहनों को संभावित रूप से स्क्रैपिंग के दायरे में बताया है। अध्ययन के अनुसार, हाई-एमिटर और पुराने भारी वाणिज्यिक वाहनों पर लक्षित कार्रवाई, नई स्क्रैपिंग सुविधाओं और राज्य-स्तरीय नियमों के जरिए परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है।
