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वंदे भारत: 4 साल में 1500 कोच तैयार, इसी वजह से उठाया गया कदम

अंबाला 09 जनवरी 2026 : भारतीय रेलवे ने बंदे भारत चेयर कार के संबंध में एक चढ़ी योजना तैयार की राहत है। रेलवे बोर्ड के नए आदेश के अनुसार, अगले चार साल (2026-27 से 2029-30) में 1500 नए बंदे भारत कोच तैयार किए जाएंगे। यह कदम देश की सबसे प्रतिष्ठित शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों के युग को विभाग समाप्त कर उन्हें आधुनिक बंदे भारत से रिप्लेस करने के लिए उठाया गया है।

रेलवे बोर्ड ने 88 नए बंदे भारत रैक बनाने का ऑर्डर जारी किया है। प्यूरी अंतरराज्यीय मागों पर चलने वाली सभी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके वक्षोभ से हटाकर उनकी जगह बंदे भारत ट्रेनें हस्सों चलाई जाएंगी। चंदे भारत के नए कोचों का उग्राम, निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी और (आईसीएफ) में किया जाएगा। इसके दी की अलावा रेल कोच फैक्टरी कपूरथला सर्दी (आरसीएफ) और रायबरेली n(एमसीएफ) में कोच बनाए जाएंगे।


रैक का शेड्यूल
वर्ष 2026-27 में सभी यूनिट्स मिलकर 16 कोच वाले 23 रेक तैयार करेंगे। वर्ष 2027-28 में चेयर कार का उत्पादन नहीं होगा (संभवतः स्लीपर बंदे भारत पर फोकस रहेगा। वर्ष 2028-29 आईसीएफ विशेष रूप से 20 कोच वाले 20 रैक बनाएगा जवकि एमसीएफ 16 कोच बाले 12 रैक बनाएगा। 2029-30 के आखिरी साल में सबसे तेज रफ्तार से 33 पैक तैयार किए जाएंगे।

रेलवे बोर्ड के निदेशक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, उत्पादन का बंटवारा किया गया है। इसके तहत आईसीएफ (चेन्नई) में 720 फैक्ट्रि‌यों को मिला टारगेट में 444 कोच और आरसीएफ (कपूरथला) में 336 कोच तैयार किए जाएंगे। कुल 88 रैक में से 20 ऐसे होंगे जिनमें 20 कोच लगाए जाएंगे ताकि भीड़भाड़ वाले मार्यों पर यात्रियों को अधिक सीटें मिल सकें।

इसलिए लिया फैसला
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पहले 120 रैंक के बाद उत्पादन रोकने की योजना थी क्योंकि ध्यान वंदे भारत के सनीपर कोच पर केंद्रित हो गया था। लेकिन शताब्दी एक्सप्रेस के पुराने होते कोचों और यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए अब नीतिगत बदलाव किया गया है। वर्तमान में 82 बंदे भारत ट्रेनें सेवा में है और इस नए ऑर्डर के बाद भारतीय रेलवे का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा।

वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रियों की पसंद बनती जा रही है। यात्रियों की तरफ से आग्रह प्राप्त हो रहे हैं कि शताब्दी की जगह अब नंदे भारत को चलाया जाए। इस पर रेलवे मंथन कर रहा है, जैसे ही इस संबंध में कोई निर्देश मिलेंगे ती जानकारी माझा कर दी जाएगी। – एनके झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।

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