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UP-MP सहयोग : वाराणसी में काशी विश्वनाथ व महाकाल न्यास के बीच 2 अहम MoU साइन

वाराणसी 01 अप्रैल 2026 धार्मिक नगरी काशी में मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शासन ने विश्वनाथ मंदिर की व्यवस्था को लेकर विस्तृत मंथन किया और प्रेजेंटेशन देखा। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास और उज्जैन महाकाल मंदिर न्यास के दो समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हुआ।

पहला MoU: मंदिर प्रबंधन
पहला समझौता काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर और महाकालेश्वर मंदिर के बीच हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना और सुविधाएं बढ़ाना है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए जो प्रबंध किए गए हैं, हर घंटे में बदलती भीड़ को देखते हुए प्रक्रिया को अनुकूलित करने की वजह से ही महाकुंभ के पलट प्रवाह, शिवरात्रि तथा सावन में भी भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित रखते हुए सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वाराणसी के मंदिर प्रबंधन मॉडल को उज्जैन में लागू किया जाएगा, जिससे दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को कम परेशानी हो।

दूसरा MoU: ODOP और GI टैग
दूसरा समझौता “One District One Product (ODOP)” और GI (Geographical Indication) टैग से जुड़ा है। इसमें दोनों राज्य मिलकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देंगे। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ODOP और GI टैग में देश में आगे है। 2017 में UP का निर्यात लगभग 88,000 करोड़ रुपये था, जो 2024 तक बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत अच्छा काम हुआ है। मध्यप्रदेश में भी चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों सहित पारंपरिक लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। दोनों राज्य इस बात पर चर्चा करेंगे कि धार्मिक पर्यटन के साथ‑साथ स्थानीय उद्योगों को कैसे मजबूत किया जाए। 

इन दोनों समझौतों का उद्देश्य
मंदिरों में बेहतर व्यवस्था, श्रद्धालुओं को सुविधा, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा। बताया जा रहा है कि यह पहल खासकर उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 के लिए काफी मददगार होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह ही सिंहस्थ में भी बेहतर भीड़ प्रबंधन और सुविधा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में योजना बनाई जा रही है। प्रयागराज कुंभ के बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए व्यवस्थाओं को और ज्यादा सुगम बनाने पर फोकस रहेगा। 

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