फगवाड़ा 12 मार्च 2026 : पंजाब के प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक शहरों में गिने जाने वाले फगवाड़ा शहर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे नंबर-1 पर लगी लगभग सभी ट्रैफिक लाइटें पिछले कई महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी हैं। ऐसा क्यों है यह अपने आप में रोचक रहस्य बना हुआ है जिसका सरकारी सूत्रों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है उक्त स्थलों पर ट्रैफिक लाईटों की अब जरूरत ही नहीं है? यदि यह सही हैं तो फिर प्रश्न यह है कि उक्त स्थलों पर स्थापित ट्रैफिक लाईटें जो खराब और बंद पड़ी हुई हैं को स्थायी तौर पर हटाया क्यों नहीं गया है।
आखिर यह ट्रैफिक सिंग्नल महज शोप पीस बनकर क्यों सजाए जा रहे है? इससे भी हैरानी की बात यह है कि फगवाड़ा में जहां ट्रैफिक नियंत्रण के लिए सिग्नलों की सख्त जरूरत हैं वहां पर अब तक ट्रैफिक लाइटें लगाई ही नहीं गईं हैं? इस संबंधी प्रशासन की ओर से इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता नजर भी नहीं आ रहा है जिसके कारण अनियंत्रित ट्रैफिक के मध्य रोजाना असंख्य लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
फगवाड़ा से होकर गुजरने वाला नेशनल हाईवे नंबर-1 बेहद व्यस्त मार्ग है। इस हाईवे से प्रतिदिन हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, इसके अलावा शहर के कई प्रमुख चौक जैसे होशियारपुर रोड चौक, गोल चौक, रैस्ट हाउस चौक,बस स्टैंड के आसपास का क्षेत्र और जीटी रोड के अन्य महत्वपूर्ण प्वाइंटस जिनमें सिविल अस्पताल को जाता अंडर पास का रास्ता ट्रैफिक के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, लेकिन इन स्थानों पर ट्रैफिक लाईटों की व्यवस्था पूरी तरह से शून्य है।
क्या कहना है कि स्थानीय लोगों का
स्थानीय लोगों का कहना हैं नेशनल हाइवे नंबर 1 पर मौजूद ट्रैफिक लाइटों के बंद होने एवं यहां के अति व्यस्त चौकों पर ट्रैफिक अव्यवस्था के बने रहते आलम के बीच ट्रैफिक लाईटों का न होना बिना ज्यादा लिखे अथवा कहे अपनी दास्तां खुद बयान कर रहा है। लोगों के अनुसार वाहन चालक अपनी-अपनी दिशा में आगे बढ़ने की कोशिशें करते हैं जिसके कारण कई बार लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्थिति और भी खराब हो जाती है। स्कूल बसें, कार्यालयों में जाने वाले कर्मचारी, ऑटो रिक्शा, दोपहिया वाहन और भारी वाहन एक साथ सड़क पर आ जाते हैं, जिससे ट्रैफिक नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो इस सबके बीच एंबुलैंस वाहन भी फंस जाते है?
चिंता की बात यह भी है कि जहां ट्रैफिक लाइटों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, वहां अब तक सरकारी तौर पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए ही नहीं गए हैं। कई व्यस्त कट और चौक ऐसे हैं जहां हर समय वाहनों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन वहां ट्रैफिक नियंत्रण के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ऐसे स्थानों पर अक्सर वाहन चालकों के बीच आगे निकलने की होड़ लग जाती है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्थानीय व्यापारियों और शहरवासियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि शहर की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की जरूरत हैं, लेकिन इसके उलट शहर में बुनियादी ट्रैफिक सुविधाएं भी ठीक से काम नहीं कर रही हैं। लोगों का तर्क हैं कि उक्त सारी सच्चाई सरकारी अमले को पता है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी व्यस्त शहर में ट्रैफिक सिग्नल यातायात व्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं। इनके बंद होने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहां नैश्नल हाईवे और शहर की सड़कें आपस में मिलती हैं। फगवाड़ा में भी कई ऐसे चौक हैं जहां तेज रफ्तार से आने वाले वाहन और स्थानीय ट्रैफिक आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। पिछले कुछ महीनों में शहर के विभिन्न चौकों पर कई छोटे-बड़े सड़क हादसों की घटनाएं सामने आई हैं, हालांकि अधिकतर मामलों में जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन यह स्थिति भविष्य के लिए चेतावनी जरूर हैं। यदि जल्द ही ट्रैफिक लाइटों को ठीक नहीं किया गया और जहां जरूरत है वहां नए सिग्नल नहीं लगाए गए तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
ट्रैफिक लाइटों को तुरंत दुरुस्त करने की मांग
शहरवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि नेशनल हाईवे नंबर-1 पर खराब पड़ी ट्रैफिक लाइटों को तुरंत दुरुस्त किया जाए और जिन स्थानों पर जरूरत के अनुसार ट्रैफिक सिग्नल नहीं हैं वहां जनहित में जल्द से जल्द नई ट्रैफिक लाइटें स्थापित की जाएं। व्यस्त चौकों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाने की भी जरूरत है ताकि शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके। अब यह देखना बाकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो फगवाड़ा में ट्रैफिक अव्यवस्था और सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ता ही जाएगा।
