जालंधर 23 मार्च 2026 : खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध जैसे हालात और अंतर्राष्ट्रीय तनाव के कारण रसोई गैस सिलैंडरों की आपूर्ति पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलैंडरों की कमी की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित मजदूर वर्ग हो रहा है, जो समय पर गैस सिलेंडर न मिलने के कारण रोजमर्रा का जीवन चलाने में कठिनाई महसूस कर रहा है। उद्योग जगत इससे चिंतित है औरों का मानना है कि कहीं मजदूर वर्ग पलायन करके अपने गृह राज्य को जाना न शुरू कर दें।
शहर के विभिन्न इलाकों में उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि घरेलू गैस सिलैंडरों की सप्लाई समय पर नहीं हो रही। लोगों का आरोप है कि सरकार भले ही कालाबाजारी और जमाखोरी पर नजर बनाए हुए हो, लेकिन इसके बावजूद गैस एजैंसियां और संबंधित कंपनियां उपभोक्ताओं को समय पर सिलैंडर उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रही हैं। कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गैस डीलर जनता को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं और डिलीवरी में जानबूझकर देरी की जा रही है।
उपभोक्ताओं ने मांग की है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग गैस एजैंसियों और डीलरों के रिकॉर्ड की जांच करे ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका कहना है कि यदि डीलरों के स्टॉक, बुकिंग और डिलीवरी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो, तो पता चल जाएगा कि कमी वास्तव में आपूर्ति की है या फिर कहीं स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है।
लोगों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय हालात का असर अब सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच चुका है। गैस सिलैंडर की कमी से घरों का बजट बिगड़ रहा है और गरीब परिवारों के लिए खाना बनाना भी मुश्किल हो रहा है। खास तौर पर दिहाड़ी मजदूर और श्रमिक परिवार इस संकट से सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनके पास अतिरिक्त पैसे नहीं होते कि वे महंगे विकल्प अपनाकर काम चला सकें। मजदूर वर्ग के लोगों ने कहा कि उन्हें समय पर गैस सिलैंडर नहीं मिल रहे, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए, कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई हो तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक उपभोक्ता को समय पर घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध हो। उपभोक्ताओं ने कहा कि गैस सिलैंडरों की किल्लत के कारण कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी, कोयला और अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे न केवल घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि गैस एजैंसियों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की जाए।
