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भाजपा की रणनीति उलटी पड़ी, जहां जीत पक्की नहीं थी वहां उम्मीदवारों को राष्ट्रवादी में भेजा

26 दिसंबर 2025 : मीरा-भाईंदर में भाजपा के दो पूर्व नगरसेवकों ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस में प्रवेश किया है। अल्पसंख्यक बहुल दो वार्ड कई वर्षों से कांग्रेस के कब्जे में हैं और इन्हें कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। इन्हीं वार्डों पर इस बार सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस की मदद से कब्जा करने के लिए भाजपा ने रणनीतिक कदम उठाया है, जिससे कांग्रेस की चिंता बढ़ सकती है।

मीरा-भाईंदर में भाजपा गठबंधन का इंतजार किए बिना इस बार भी अकेले दम पर नगर निगम की सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का उद्देश्य 70 से अधिक सीटें जीतना है। पिछली टर्म में भाजपा के 65 नगरसेवक थे। इसी कारण पार्टी ने पहले से जीते गए वार्डों के साथ-साथ सहयोगी शिवसेना और विपक्षी कांग्रेस के कब्जे वाले वार्डों पर भी फोकस बढ़ा दिया है।

नयानगर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं, जहां बीते कई वर्षों से लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार जीतते रहे हैं। यहां भाजपा के लिए जीत मुश्किल मानी जाती है। इसलिए भाजपा ने इन वार्डों की सीटें सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस को देने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के पूर्व नगरसेवकों और पार्टी द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों को टिकट देने की शर्त पर यह रणनीति अपनाई गई है।

इसी कड़ी में मूल रूप से कांग्रेस से जुड़े रहे और बाद में भाजपा में रहे पूर्व नगरसेवक नरेश पाटील और अमजद शेख ने बुधवार को मीरा-भाईंदर राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रभारी आनंद परांजपे और जिलाध्यक्ष प्रमोद कांबळे की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। चर्चा है कि उन्हें आगामी चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया जाएगा। इस मौके पर कांबळे ने विश्वास जताया कि सत्ता में आने पर राष्ट्रवादी के नगरसेवक विकास कार्यों को गति देंगे।

कांग्रेस को लग सकता है झटका
नयानगर इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ-साथ एमआईएम और वंचित बहुजन आघाड़ी भी चुनाव की तैयारी कर रही हैं। यदि ऐसा होता है तो अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ेगी, जिससे नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।

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