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250 रुपये टोल भारी पड़ रहा! 26 महीनों में उम्मीद से आधी रही आवाजाही, आम लोगों ने बनाई दूरी

मुंबई 31 मार्च 2026 : हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने Atal Setu पर अब भी अपेक्षित ट्रैफिक नहीं पहुंच पा रहा है। पिछले 26 महीनों में करीब 2 करोड़ वाहनों ने इस पुल का उपयोग किया, लेकिन यह आंकड़ा प्रशासन की उम्मीद से लगभग आधा ही रहा है।

Mumbai Metropolitan Region Development Authority द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में करीब 1.81 करोड़ निजी कारें, एसयूवी और अन्य व्यक्तिगत वाहन अटल सेतु से गुजरे। वहीं, हल्के वाणिज्यिक वाहन, मिनीबस, बस और ट्रक की संख्या लगभग 5.98 लाख रही, जबकि भारी वाहनों की संख्या 12 लाख से अधिक दर्ज की गई।

उम्मीद से आधी रही आवाजाही
आंकड़ों के मुताबिक, अटल सेतु पर रोजाना औसतन करीब 25,478 वाहन ही चल रहे हैं, जबकि शुरुआत में अनुमान था कि यहां रोज 56 हजार से ज्यादा वाहन गुजरेंगे। यानी वास्तविक ट्रैफिक अनुमान से काफी कम है।

इस पुल का उद्घाटन Narendra Modi ने 13 जनवरी 2024 को किया था। हालांकि उद्घाटन के बाद भी ट्रैफिक में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी।

टोल बना बड़ी वजह
अटल सेतु पर कम ट्रैफिक की सबसे बड़ी वजह इसका टोल माना जा रहा है। रोजाना यात्रा करने वाले वाहन चालकों को 250 रुपये तक का टोल देना पड़ता है, जो आम लोगों को महंगा लगता है। इसी कारण पहले साल में औसतन सिर्फ 22,689 वाहन प्रतिदिन ही इस मार्ग का उपयोग कर रहे थे।

पुराने रास्तों पर अब भी दबाव
उच्च टोल के कारण कई वाहन चालक अभी भी पुराने वाशी-पनवेल मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वहां ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। इससे न केवल यात्रा समय बढ़ रहा है, बल्कि प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सोशल मीडिया प्रचार या आंकड़े साझा करने के बजाय टोल दरों में कमी जैसे कदम उठाना जरूरी है। यदि इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अपेक्षित उपयोग नहीं पा रहा है, तो यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नीतिगत बदलाव करना जरूरी हो जाता है।

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