परभणी 12 फरवरी 2026 : परभणी महानगरपालिका के महापौर पद का चुनाव आज संपन्न हुआ, जिसमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार इकबाल सैयद ने जीत हासिल की। मतदान में इकबाल सैयद को 65 में से 39 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार तिरुमला खिलारे को 26 वोट मिले। इस तरह 13 वोटों से जीत दर्ज कर इकबाल सैयद परभणी के नए महापौर बने।
चंद्रपुर की तरह परभणी में भी भाजपा की ओर से तोड़फोड़ की राजनीति की कोशिश की गई, लेकिन महाविकास आघाड़ी ने इसे नाकाम कर दिया। कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) आखिरी तक एकजुट रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि परभणी नगर निगम में पहली बार शिवसेना का महापौर बना। राज्य स्तर पर उद्धव ठाकरे को भले ही झटके लगे हों, लेकिन परभणी में शिवसेना की जीत से जिला एक बार फिर पार्टी का गढ़ साबित हुआ है।
क्या हुआ महापौर चुनाव में?
नगर निगम चुनाव में शिवसेना (उबाठा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 25 सीटें जीती थीं। इसके बाद कांग्रेस को 12, भाजपा को 12, राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) को 11, जनसुराज्य पार्टी को 3, यशवंत सेना को 1 और एक सीट निर्दलीय को मिली थी। पहले से ही कांग्रेस और शिवसेना ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और दोनों मिलकर 37 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े को पार कर चुके थे।
महापौर पद के लिए कुल 14 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा था, लेकिन बाद में 12 ने अपने नाम वापस ले लिए। अंत में शिवसेना-कांग्रेस की ओर से इकबाल सैयद और भाजपा की ओर से तिरुमला खिलारे के बीच सीधा मुकाबला हुआ। भाजपा को अजित पवार गुट और जनसुराज्य पार्टी का समर्थन मिला, जिससे उन्हें कुल 26 वोट मिले। वहीं इकबाल सैयद को शिवसेना और कांग्रेस के 38 वोट मिले, साथ ही अजित पवार गुट के अक्षय देशमुख का एक वोट भी मिला, जिससे उनका आंकड़ा 39 पहुंच गया और उन्होंने 13 वोटों से जीत दर्ज की।
ठाकरे गुट के सांसद और विधायक की भूमिका
राज्य में शिवसेना को कई जगह झटके लगे हैं, लेकिन परभणी में ठाकरे गुट के सांसद संजय जाधव और विधायक डॉ. राहुल पाटील ने अपनी राजनीतिक पकड़ दिखाई। शिवसेना ने मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के नेता को महापौर बनाकर राज्य को एक अलग संदेश दिया है। भाजपा के तमाम प्रयासों के बावजूद परभणी में सत्ता संतुलन बदल नहीं पाया।
