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तरुण चुघ का आरोप: राहुल गांधी और कांग्रेस नेता किसानों के मुद्दों से भटका रहे हैं ध्यान

पंजाब 13 फरवरी 2026 भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महामंत्री तरुण चुघ ने पंजाब कांग्रेस नेता राहुल  गांधी, राजा वडिंग, प्रताप सिंह बाजवा व कांग्रेस के तमाम नेताओं बड़ा हमला बोला है। उक्त नेताओं द्वारा भारत द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझोते को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुघ ने कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याओं को उठाने के बजाय कांग्रेस नेता जानबूझकर डर और झूठ का माहौल बना रहे हैं। चुघ ने कहा कि वैश्विक साजिशों और कॉर्पोरेट नियंत्रण जैसी झूठी कहानियां गढ़कर किसानों को गुमराह करना कांग्रेस की पुरानी राजनीति रही है।

चुघ ने आगे स्पष्ट किया कि पंजाब की सबसे महत्वपूर्ण फसलें पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर किसी भी प्रकार की शुल्क कटौती नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल जैसे मुख्य अनाजों पर कोई शुल्क कटौती नहीं हुई है, जिससे इनके अतिरिक्त आयात के लिए बाजार नहीं खोला गया। उन्होंने कहा कि मानव उपभोग हेतु मक्का पूरी तरह सुरक्षित है और दलहन जैसे तूर, मूंग, उड़द, चना और मटर भी इस प्रकार के किसी भी समझौते से बाहर रखे गए हैं। श्री अन्न अर्थात ज्वार, बाजरा, रागी सहित सभी प्रमुख मिले्ट भी पूरी तरह संरक्षित हैं।

चुघ ने जोड़ा कि तिलहन और उससे जुड़े उत्पाद जैसे सोयामील, सरसों, मूंगफली तथा निर्धारित कोटा से बाहर खाद्य तेलों पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि तिलहन किसानों का हित सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि दूध, चीज, मक्खन और घी सहित पूरी डेयरी श्रेणी समझौते से बाहर रखी गई है। पोल्ट्री, मांस, शहद और अंडे जैसे उत्पाद भी पूरी तरह संरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि केला, नींबूवर्गीय फल, स्ट्रॉबेरी और चेरी जैसे फलों पर भी कोई अतिरिक्त बाजार नहीं खोला गया है, जबकि गन्ने से बनने वाले एथेनॉल और अनुवांशिक संशोधित खाद्य उत्पादों पर भी कोई ढील नहीं दी गई है।

चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने भारतीय किसानों के लिए अमेरिका और यूरोप जैसे दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों के द्वार खोले हैं, जिससे कृषि उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और एमएसएमई क्षेत्र को नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान मजबूत और आत्मनिर्भर हैं तथा उन्हें डर फैलाने वाली राजनीति की नहीं बल्कि नए बाजारों और ईमानदार नेतृत्व की जरूरत है।

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