मुंबई 27 जनवरी 2026 : राज्य में महायुति की सरकार सत्ता में होने के बावजूद, अब आंतरिक विवाद खुले तौर पर सामने आने लगे हैं। भाजपा नेता और पूर्व मंत्री गणेश नाईक द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कड़ी आलोचना से शिवसेना (शिंदे गुट) में तीव्र नाराजगी पैदा हुई है। नाईक ने कहा था, “भाजपा ने अनुमति दी तो उनके नामोनिशान खत्म कर देंगे,” जिस पर अब उत्पाद शुल्क मंत्री शंभुराज देसाई ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और नवी मुंबई में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।
शंभुराज देसाई का बयान:
गणेश नाईक के इस बयान पर पत्रकारों से बात करते हुए शंभुराज देसाई ने कहा,
“राजनीति में कोई किसी को कमतर न समझे। अगर कोई किसी को खत्म करने की भाषा बोल रहा है, तो सामने बैठे लोग भी कोई हाथ की घड़ी नहीं हैं। हमें भी राजनीति आती है। अगर हमारे नेतृत्व की आलोचना हुई, तो समय आने पर हम भी अपनी भूमिका निभाएंगे और हमारा पक्ष नाईक को जवाब देगा।”
योगेश कदम की प्रतिक्रिया:
इसके बाद शिवसेना के युवा विधायक और मंत्री योगेश कदम ने भी नाईक को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा,
“गणेश नाईक स्वयं मूल रूप से शिवसैनिक हैं, इसलिए उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं कि एक शिवसैनिक क्या कर सकता है।”
नंदुरबार दौरे पर कदम ने नाईक के बयान की कड़ी आलोचना की और कहा,
“एक महानगरपालिका पूरे महाराष्ट्र के बराबर नहीं है। एक शहर की राजनीति देखकर इतनी बड़ी बातें नहीं करनी चाहिए। नाईक को अब अपनी भाषा और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए।”
संजय शिरसाट का बयान:
गणेश नाईक के बयान पर शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“नाईक का जरा ज्यादा ही हो गया है। नामोनिशान मिटाना कोई नवी मुंबई के पहाड़ हैं क्या? हम जिद्दी खड़े रहने वाले लोग हैं। एकनाथ शिंदे की वजह से आप आज सत्ता में हैं, यह मत भूलिए। देवेंद्र फडणवीस से आदेश लेना ठीक है, लेकिन बार-बार ऐसी अभद्र बातें करके आप बड़े नहीं बनेंगे।”
शिरसाट ने आगे कहा,
“हम महायुति का धर्म निभा रहे हैं इसका मतलब यह नहीं कि हमें कुछ नहीं आता। हमारा त्याग है इसलिए आज सत्ता में हैं। शिंदे को हल्के में लेने की भूल न करें, इस पर मैं खुद फडणवीस से बात करूंगा।”
