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Sharad Pawar फिर केंद्र में! क्या महायुति-मविआ का ‘वो’ उम्मीदवार होगा परास्त? ‘दूसरे’ वोट बदल सकते हैं खेल

महाराष्ट्र 25 फरवरी 2026 : राज्यसभा की 37 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। इन सीटों में Sharad Pawar की सीट भी शामिल है, जिनका कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इन सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है।

संख्याबल के आधार पर महायुति 7 में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) अगर एकजुट रही तो उसे सिर्फ 1 सीट मिलने की संभावना है।

MVA के भीतर रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। Supriya Sule ने अपने पिता शरद पवार के लिए समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है और इस सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और नेता विपक्ष Rahul Gandhi से चर्चा होने वाली है। वहीं, Uddhav Thackeray से भी बातचीत की तैयारी है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस राज्यसभा की एक सीट के बदले विधान परिषद की सीट शिवसेना (उद्धव गुट) को देने का प्रस्ताव दे रही है। अगर कांग्रेस और शिवसेना के बीच समझौता होता है, तो शरद पवार के लिए राज्यसभा का रास्ता मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, शरद पवार के सभी दलों से अच्छे संबंध और उनका लंबा राजनीतिक अनुभव देखते हुए अगर वे चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। पवार अब तक दो बार राज्यसभा जा चुके हैं और दोनों बार निर्विरोध चुने गए थे।

अगर शरद पवार चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो उनके दल के 10 वोट किस ओर जाएंगे, यह बड़ा सवाल होगा। ऐसे में महायुति सातवां उम्मीदवार उतारकर खेल बिगाड़ सकती है।

2022 की तरह क्रॉस वोटिंग और दूसरी पसंद के वोटों का खेल फिर देखने को मिल सकता है। उस समय Devendra Fadnavis ने रणनीति के जरिए अतिरिक्त उम्मीदवार जिताए थे, जिससे MVA को नुकसान हुआ था।

अब एक बार फिर वही स्थिति बनती दिख रही है, जहां शरद पवार की भूमिका चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकती है।

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