मुंबई 16 फरवरी 2026 : उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अपघाती निधन के बाद राज्य में शोक की लहर फैल गई। सरकार ने शासकीय शोक घोषित किया। लेकिन इसी बीच उनके जिम्मे रहे अल्पसंख्यक विभाग में एक गंभीर मामला सामने आया।
अजित पवार के निधन के दिन, मंत्रालय में अचानक ७५ शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। यह निर्णय गहन संवेदनशीलता के बावजूद बिना नियमों का पालन किए और घाई-घाई में किया गया। अगस्त 2025 से इस प्रक्रिया को स्थगित किया गया था, लेकिन पवार के निधन के बाद विभाग के अधिकारियों ने इसे अचानक लागू कर दिया।
28 जनवरी की सुबह लगभग 8:45 बजे अजित पवार का निधन हुआ और दोपहर 3 बजे तक अल्पसंख्यक विभाग ने इन स्कूलों को प्रमाणपत्र जारी कर दिए। यह मामला राज्य में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि नियम और संवेदनशीलता की अनदेखी की गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और इस निर्णय को स्थगित कर दिया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया।
युवक कांग्रेस के सरचिटणीस अक्षय जैन ने इस प्रक्रिया में संभावित आर्थिक गड़बड़ी का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की। साथ ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने भी इस मामले में सीआइडी द्वारा जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
इस पूरे प्रकरण ने उजागर किया कि पवार के निधन के बाद कुछ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र बांटने का गंभीर कदम उठाया, जो नियम और संवेदनशीलता दोनों के खिलाफ था।
