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Delhi में 100 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना

नई दिल्ली 30 मार्च 2026 : दिल्ली में गिरते भूजल स्तर और बढ़ती पानी की कमी से निपटने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी प्लॉटों पर Rain Water Harvesting (RWH) सिस्टम लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।

डीपीसीसी की ओर से दायर एक्शन टेकन रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस नियम का पालन नहीं करती है या सिस्टम लगाने के बाद उसका सही रखरखाव नहीं करती, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA), जिला उपायुक्त, दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को जिम्मेदारी दी जाएगी। डीपीसीसी के वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर डॉ. अनवर अली खान ने एनजीटी के 4 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में यह रिपोर्ट दाखिल की है।

जुर्माने की स्पष्ट व्यवस्था प्रस्तावित

दिल्ली सरकार ने वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने के लिए जुर्माने की स्पष्ट व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। 17 मई 2023 की रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग आकार के प्लॉट के लिए जुर्माने की राशि तय की गई है।

प्लॉट का आकारप्रस्तावित जुर्माना
100 से 500 वर्ग मीटर50,000 रुपये
501 से 2000 वर्ग मीटर1,00,000 रुपये
2001 से 5000 वर्ग मीटर2,00,000 रुपये
5000 वर्ग मीटर से अधिक5,00,000 रुपये

गैर-आवासीय भवनों के मामले में यह जुर्माना 50 प्रतिशत अधिक होगा। यह राशि दिल्ली जल बोर्ड, डीपीसीसी, जिला प्रशासन या एमसीडी के अधिकृत अधिकारी वसूलेंगे और इसे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने में खर्च किया जाएगा।

निगरानी के लिए बनेगी संयुक्त समिति

रेन वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए एक नई संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इसमें डिवीजनल कमिश्नर को अध्यक्ष बनाया जाएगा, जबकि डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ और एमसीडी कमिश्नर सदस्य होंगे।

दिल्ली जल बोर्ड को इस समिति का कन्वीनर बनाया जाएगा। यह समिति एनजीटी और सीजीडब्ल्यूए के निर्देशों के पालन की निगरानी करेगी, लोगों में जागरूकता अभियान चलाएगी और हर तीन महीने में मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंपेगी।

इसके अलावा सभी जिलों के उपायुक्त 100 वर्ग मीटर से बड़े भवनों में वर्षा जल संचयन सिस्टम लगाने और उसके रखरखाव की निगरानी करेंगे। शिकायत मिलने पर जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अलग-अलग विभागों को मिली जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

  • सीजीडब्ल्यूए:  भूजल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन से जुड़े नियम तय करेगा।
  • जिला उपायुक्त:  अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी करेंगे।
  • एमसीडी: 100 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर निर्माण की अनुमति देते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता सुनिश्चित करेगा।
  • दिल्ली जल बोर्ड: सिस्टम का डिजाइन, तकनीकी दिशा-निर्देश और निरीक्षण का काम संभालेगा।

यदि बड़े भवनों या सोसासटियों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया, तो पानी के बिल पर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क भी लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया, तो दिल्ली में भूजल स्तर को सुधारने और पानी की कमी से निपटने में काफी मदद मिल सकती है।

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