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धान सीजन से पहले पंजाब ने पराली प्रबंधन पर बजट बढ़ाया

7 अप्रैल, 2026:*  पंजाब में धान के आगामी सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। कृषि कार्ययोजना के तहत करीब 43 प्रतिशत बजट पराली प्रबंधन के लिए आवंटित किया गया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाना चाहती है।

पंजाब लंबे समय से पराली जलाने की समस्या से जूझ रहा है, जिसका असर न केवल राज्य बल्कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता पर पड़ता है। हर साल धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार ने पहले से ही रणनीति तैयार कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि इस बजट का उपयोग किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने, जागरूकता बढ़ाने और वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने में किया जाएगा। इससे किसानों को पराली जलाने के बजाय अन्य विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाता है, तो इससे पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि किसानों को समय पर सहायता मिले और उन्हें आर्थिक रूप से भी समर्थन दिया जाए।

किसानों का कहना है कि वे पराली नहीं जलाना चाहते, लेकिन उनके पास समय और संसाधनों की कमी होती है, जिसके कारण वे मजबूरी में ऐसा कदम उठाते हैं। ऐसे में यदि सरकार उन्हें उचित साधन और सहायता उपलब्ध कराती है, तो इस समस्या का समाधान संभव है।

इस पहल से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

कुल मिलाकर यह कदम न केवल कृषि क्षेत्र बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले महीनों में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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