मुंबई 26 फरवरी 2026 : पुणे-नाशिक सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना का प्रस्तावित मार्ग अहिल्यानगर-शिर्डी के जरिए लेने पर तीव्र विरोध होने के कारण मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने बुधवार को घोषणा की कि अब यह देखा जाएगा कि क्या पुराने मार्ग से ही पुणे-नाशिक रेल विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नारायणगांव में स्थित ‘जायंट मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप’ के संरक्षित क्षेत्र (बफर ज़ोन) को कोई खतरा नहीं होगा और पुराने मार्ग पर स्थित महत्वपूर्ण गांवों को भी नुकसान नहीं होगा। तज्ज्ञ सलाहकारों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।
विधान परिषद में आमदार सत्यजित तांबे के सवाल का जवाब देते हुए फडणवीस ने परियोजना में आने वाली चुनौतियां स्पष्ट की और कहा कि राज्य सरकार की भूमिका केंद्र सरकार जैसी ही है। उन्होंने यह भी बताया कि रेल मंत्रालय के साथ बातचीत कर अगले तीन-चार महीनों में सलाहकारों से उपयुक्त मार्ग तय करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य अड़चन:
पुणे-नाशिक रेल मार्ग नाशिक-सिन्नर-संगमनेर-अकोले-नारायणगांव-मंचर-चाकण मार्ग से प्रस्तावित था। लेकिन नारायणगांव में 32 देशों की भागीदारी वाली विश्व स्तरीय ‘जीएमआरटी’ वेधशाला है। रेल की लहरों (vibrations) से इस वेधशाला के काम में बाधा आने का खतरा है, इसलिए केंद्र सरकार ने इस मार्ग को अस्वीकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विकल्प मार्ग पर ही विचार करना होगा।
समाधान की रूपरेखा:
- रेल मंत्रालय और क्षेत्र के विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी।
- अगले 3-4 महीनों में सलाहकार तय करेंगे कि पुणे-नाशिक रेल मार्ग के लिए सबसे उपयुक्त मार्ग कौन सा है।
- वेधशाला के नियमों का पालन करते हुए और मूल मार्ग में बड़े बदलाव किए बिना (डेविएशन) सभी महत्वपूर्ण गांव रेल से जुड़े रहें, इसका अध्ययन किया जाएगा।
शिर्डी मार्ग पर विरोध के कारण:
- शिर्डी मार्ग लेने पर यात्रा समय कम से कम 30 मिनट बढ़ जाएगा।
- पुराने प्रस्तावित मार्ग पर संगमनेर, सिन्नर, नारायणगांव, चाकण जैसे महत्वपूर्ण स्थान रेल नेटवर्क से बाहर हो जाएंगे।
- स्थानीय लोग और गांवों की क्रियाशील समितियां इस मार्ग बदलने का तीव्र विरोध कर रही हैं।
