पुणे 11 जनवरी 2026 : राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने लड़कियों को मुफ्त शिक्षा देने के फैसले की फाइल पर करीब छह महीने तक हस्ताक्षर नहीं किए थे। पाटिल के मुताबिक, अजित पवार ने यह कहते हुए फाइल रोक दी थी कि “क्या राज्य की तिजोरी बेच दें?”, क्योंकि इस योजना पर करीब 900 करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा था।
चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि परभणी में फीस न भर पाने के कारण एक छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना से तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बेहद आहत हुए थे। इसके बाद शिंदे ने उन्हें फोन कर तुरंत लड़कियों की शिक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय लेने के निर्देश दिए। उसी के तहत शिक्षा शुल्क और परीक्षा शुल्क माफ करने की योजना लागू की गई।
पाटिल के अनुसार, जब अजित पवार ने फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ शब्दों में कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और उस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इसके बाद जाकर इस योजना के लिए 900 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएचडी छात्रों को मिलने वाले अनुदान, पुस्तकालयों को सहायता और 78 कॉलेजों को अनुदान देने से जुड़ी फाइलें भी अब तक लंबित हैं। पाटिल ने कहा कि इन फाइलों को 120 बार भेजे जाने के बावजूद कोई फैसला नहीं लिया गया।
चंद्रकांत पाटिल ने आगे आरोप लगाया कि एक तरफ अजित पवार शिक्षा, प्रोफेसर भर्ती और अन्य योजनाओं के लिए फंड की कमी का हवाला देकर विरोध करते हैं, वहीं दूसरी ओर पुणे में पीएमपीएमएल और मेट्रो में मुफ्त यात्रा की घोषणाएं कर रहे हैं, जो केवल राजनीतिक स्टंट हैं।
